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आखिर डकार दिया गार्बेज कलेक्शन का पैसा! नाहन नगर परिषद में रसीदों के खेल से लाखों के हेरफेर की आशंका

Shailesh Saini • 1 Hour Ago • 1 Min Read

दो साल तक ऑडिट का जवाब दबा रहा, रसीद बुकें गायब मिलीं; ईओ ने खोली फाइल तो कर्मचारियों से मांगा जवाब, पुलिस में शिकायत और चार्जशीट की तैयारी

हिमाचल नाऊ न्यूज नाहन

नाहन नगर परिषद में डोर-टू-डोर गार्बेज कलेक्शन के नाम पर शहरवासियों से वसूले गए पैसे में कथित हेरफेर का मामला सामने आया है। वर्ष 2021 से 2023 के बीच की रसीदों और राजस्व रिकॉर्ड की जांच में रसीद बुकों के गायब होने और वसूली गई राशि के नगर परिषद के खाते में जमा होने को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि गार्बेज कलेक्शन के नाम पर लोगों से पैसा तो वसूला गया, लेकिन उसका पूरा हिस्सा नगर परिषद के खजाने तक नहीं पहुंचा। पूरे मामले में लाखों रुपये के कथित हेरफेर की आशंका जताई जा रही है।

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ऑडिट के दौरान सामने आई इन अनियमितताओं पर करीब दो साल तक नगर परिषद की ओर से जवाब तक दाखिल नहीं किया गया। इसके बाद हिमाचल प्रदेश शहरी विकास विभाग ने नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। नोटिस के बाद दबा हुआ मामला दोबारा खुला और अब इसकी जांच आगे बढ़ रही है।

मौजूदा कार्यकारी अधिकारी संजय कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा। सूत्रों के अनुसार कर्मचारियों की ओर से दिए गए जवाब जांच में संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद कार्यकारी अधिकारी ने मामले की लिखित शिकायत पुलिस थाना नाहन में भी कर दी है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक पुलिस की ओर से प्राथमिकी दर्ज किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। वहीं नगर परिषद स्तर पर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ आरोपपत्र तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू किए जाने की जानकारी है।

जांच में सामने आया है कि डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने के दौरान उपभोक्ताओं को दी जाने वाली रसीदों के हिसाब से वसूली गई रकम और नगर परिषद के खाते में जमा राशि का मिलान किया जा रहा है। कुछ रसीद बुकों के गायब होने के साथ कुछ रसीदों के फर्जी तरीके से छपवाए जाने अथवा इस्तेमाल किए जाने की आशंका भी जांच के घेरे में है। ऐसे में अब यह पता लगाया जा रहा है कि संबंधित रसीदों के जरिए कितनी राशि लोगों से वसूली गई और उसमें से कितनी रकम नगर परिषद के खाते में जमा हुई।

मामला अब गार्बेज कलेक्शन से आगे बढ़कर नगर परिषद के दूसरे राजस्व स्रोतों तक भी पहुंचता नजर आ रहा है। रेहड़ी-फड़ी, तहबाजारी और नगर परिषद की जमीन पर लगने वाली अस्थायी दुकानों से होने वाली वसूली के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। कुछ हॉकरों की ओर से कथित तौर पर 100 से 200 रुपये तक वसूली किए जाने के बावजूद रसीद न दिए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। यदि इन शिकायतों और रिकॉर्ड की जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो कथित वित्तीय हेरफेर की राशि और बढ़ सकती है।

अब नगर परिषद के सामने सबसे बड़ा काम पिछले वर्षों के रसीद रिकॉर्ड, रसीद बुकों की संख्या, जारी रसीदों, वसूली गई राशि और बैंक में जमा रकम का मिलान करना है। इससे साफ हो सकेगा कि कथित गड़बड़ी कितनी बड़ी है और इसकी जिम्मेदारी किन लोगों पर तय होती है।

गौरतलब है कि नाहन नगर परिषद पहले भी डीजल से जुड़े कथित घोटाले को लेकर सवालों के घेरे में रह चुकी है। ऐसे में रसीदों और राजस्व वसूली से जुड़ा नया मामला सामने आने के बाद नगर परिषद की वित्तीय निगरानी और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी संजय कुमार ने पुलिस को लिखित शिकायत दिए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि मामले में जांच की जा रही है और जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। समाचार लिखे जाने तक पुलिस प्राथमिकी दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई है। कथित हेरफेर की वास्तविक राशि और जिम्मेदार लोगों का पता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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