आत्मा को जन्म व मृत्यु के बंधन से मुक्त कराने को अपनाएं भक्ति मार्ग- गौरी भारती
सिरमौर के शिल्ला गांव में हवन यज्ञ और भंडारे के साथ श्रीमद्भागवत कथा का समापन
HNN/शिलाई
विश्व शांति एवं सर्वकल्याण की कामना के साथ गिरिपार क्षेत्र के गांव शिल्ला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का समापन हो गया। इस पावन मौके पर हवन यज्ञ और विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया। प्रवचन के दौरान दिव्य ज्योति जागृति संस्थान एवं श्रीआशुतोष महाराज जी की शिष्या व्यास साधवी सुश्री गौरी भारती ने कहा कि आत्मा को जन्म व मृत्यु के बंधन से मुक्त कराने के लिए भक्ति मार्ग से जुड़कर सत्कर्म करना होगा।

हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मन वांछित फल प्रदान करते हैं। व्यास साधवी भारती ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। श्रीमद्भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं।

इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है। कथा के समापन पर हवन यज्ञ में यजमान बने गुरुदत्त चौहान व उनकी धर्म पत्नी निर्जल चौहान, दुलाराम चौहान, शीला देवी, नरेश चौहान, बिमला देवी, दीपा राम, सरिता देवी अन्य सदस्यों ने महासू प्रांगण पर हवन यज्ञ करने के बाद आरती कर श्रीमद्भागवत कथा का समापन किया।

कथा समापन पर समस्त शिल्ला ग्रामवासियों की तरफ से भंडारे का प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर नंबरदार सुमेरचंद, दुलाराम, विक्रम सिंह, बबलू चौहान, दीपाराम धीमान, रमेश चंद , ओमप्रकाश, काकुराम, कपिल चौहान आदि मौजूद रहे।