आदिरंग महोत्सव में गूंजी हाटी की नाटी, सिरमौर की संस्कृति का जादू छाया
हरसूद में आसरा संस्था के कलाकारों ने बिखेरा गिरिपार की लोक परंपराओं का रंग
नाहन
मध्यप्रदेश के हरसूद में आयोजित आदिरंग महोत्सव में सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र की हाटी संस्कृति ने अपनी विशेष पहचान बनाई। आसरा संस्था, पझौता के कलाकारों ने पारंपरिक हाटी की नाटी की मनोहारी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आसरा संस्था के प्रभारी एवं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार डॉ. जोगेन्द्र हाब्बी ने बताया कि 20 से 22 मार्च तक आयोजित इस तीन दिवसीय महोत्सव में देशभर के 25 से अधिक सांस्कृतिक दलों ने भाग लिया, लेकिन हाटी की नाटी अपनी विशिष्ट शैली और सौंदर्य के कारण आकर्षण का केंद्र बनी रही।
डॉ. हाब्बी के निर्देशन में कलाकारों ने ठोडा नृत्य, रिहाल्टी गीत, दीपक एवं परात नृत्य तथा रासा नृत्य जैसी लोक विधाओं की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से सिरमौरी लोकजीवन की परंपरा, लय और सांस्कृतिक समृद्धि का जीवंत प्रदर्शन हुआ।
उन्होंने बताया कि पद्मश्री विद्यानंद सरैक के मार्गदर्शन में हाटी की नाटी के साथ-साथ सिंहटू, भड़ाल्टू और डगैली नाच जैसी विलुप्तप्राय लोक विधाओं को भी पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान मिल रही है। महोत्सव में आसरा संस्था के कलाकारों में गोपाल सिंह हाब्बी, रामलाल वर्मा, बिमला चौहान, देवीराम, संदीप, रविदत्त सहित अन्य लोक कलाकारों ने अपनी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।