इतिहासकार प्रो संदीप कनिष्क ने शब्दों से रचा समाज का आईना, पहली काव्य कृति प्रकाशित
हिमाचल नाऊ न्यूज़ संगड़ाह
राजकीय महाविद्यालय संगड़ाह के सहायक प्रोफेसर संदीप कुमार कनिष्क ने इतिहास के गंभीर अध्ययन के बाद अब कविता की दुनिया में कदम रखा है। उनका पहला काव्य संग्रह ‘बातें जरूरी हैं’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ है, जिसने उनकी साहित्यिक यात्रा को एक नया आयाम दिया है।
इस संग्रह में कुल 25 स्वरचित कविताएं शामिल हैं, जो समाज की समस्याओं, मानवीय भावनाओं, प्रेम, महिला उत्पीड़न, देशप्रेम और राजनीतिक व सामाजिक व्यंग्य जैसे विषयों को अभिव्यक्त करती हैं।
सिरमौर के राजगढ़ उपमंडल के बेहड़ गांव से संबंध रखने वाले प्रो. कनिष्क, इतिहास पर पहले ही छह किताबें प्रकाशित कर चुके हैं। पिछले दो महीनों में यह उनकी तीसरी पुस्तक है, जिससे उनकी लेखनी की गति और प्रतिभा का पता चलता है।
प्रो. कनिष्क ने बताया कि इस काव्य संग्रह को प्रकाशित करने की प्रेरणा उन्हें राजकीय महाविद्यालय संगड़ाह की प्राचार्या डॉ. मीनू भास्कर से मिली।
यह कृति न केवल उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि एक शिक्षाविद अपनी विशेषज्ञता के साथ-साथ रचनात्मक साहित्य में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।