कृष्ण पाल गुर्जर की उपस्थिति बताएगी गुर्जरों का रुझान या फिर…
HNN / नाहन
नाहन विधानसभा में भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रहा मुकाबला अब कांटे की टक्कर पर पहुंच चुका है। 12 नवंबर को मतदान से पहले हर दिन दोनों प्रमुख उम्मीदवारों के समीकरण घटते-बढ़ते नजर आ रहे हैं। नाहन के विधायक डॉ राजीव बिंदल के कार्डर वोट बैंक में जहां गुटबाजी व भितरघात पर जनता के किए गए विकास कार्य पर डैमेज कंट्रोल हो रहा है। तो वही, कांग्रेस प्रत्याशी अजय सोलंकी को कर्मचारियों सहित मुस्लिम तथा गुर्जर वोट बैंक की संजीवनी भी मिल रही है। यही नहीं जातीय समीकरण के आधार पर राजपूत वोट बैंक का बड़ा हिस्सा भी अजय सोलंकी को मजबूत बना रहा है।
स्थानीय होने के नाते रसूख को लेकर तथा अन्य जातीय समीकरणों में अजय सोलंकी की स्थिति पहले से अच्छी बनी है। अब यदि बात की जाए डॉ राजीव बिंदल की, तो इस विधानसभा क्षेत्र में करवाया गया अभूतपूर्व विकास सोलंकी की जीत में सबसे बड़ा रोड़ा है। यही नहीं, बीते कुछ वर्षों में डॉ राजीव बिंदल ने कर्मचारियों के साथ भी चाहे वह भाजपा का हो चाहे वह कांग्रेस का हो बगैर किसी दुर्भावना के साथ दिया है।
बावजूद इसके नगर परिषद के कुछ भाजपा समर्थित निष्क्रिय पार्षदों, ग्राम-प्रधानों के चलते शहर के साथ-साथ लोअर बेल्ट में मतदाताओं के रुझान को बदला हुआ है। अब यदि बात की जाए गुर्जर और मुस्लिम वोट बैंक की, तो उस पर बड़ा फायदा कांग्रेस के स्थानीय प्रत्याशी अजय सोलंकी को मिलता नजर आता है। इस विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम वोट बैंक 15000 से ऊपर है। जबकि हाटी को एसटी का दर्जा दिए जाने पर भड़का हुआ गुर्जर समाज का वोट बैंक 10,000 से अधिक है। जिसमें हिंदू और मुस्लिम गुर्जर भी शामिल है।
बता दें कि गुर्जर वोट बैंक पर डॉ राजीव बिंदल का एक बड़ा कब्जा था। मगर सरकार के द्वारा चुनावी वक्त पर लिए गए निर्णय के कारण हुई गुर्जरों की अनदेखी बिंदल के लिए भारी पड़ गई है। भाजपा में प्रदेश व जिला स्तर के गुर्जर भाजपा नेता पहले ही अपने पार्टी के पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। मगर कुछ ऐसे भी गुर्जर पदाधिकारी हैं, जो अभी भी पार्टी की जगह डॉ राजीव बिंदल के साथ पूरी निष्ठा से जुड़े हुए हैं। मगर इनकी संख्या केवल दर्जनों में ही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 8 नवंबर यानी कल स्मृति ईरानी के साथ-साथ केंद्रीय राज्य ऊर्जा मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर नाहन पहुंच रहे हैं। जिसको लेकर गुर्जर समाज में काफी चर्चा भी चल रही है। नाराज चल रहा गुर्जरों का बड़ा वर्ग यह कह रहा है कि हरियाणा के गुर्जर विधायक लीलाराम जिन्होंने सुरजेवाला जैसे नेता को हराया था वह भी उनकी नाराजगी को दूर नहीं कर पाए थे। ऐसे में कृष्ण पाल गुर्जर के आने से कोई डैमेज कंट्रोल हो पाए ऐसा नजर नहीं आता है।
ऐसे में यदि कांग्रेस सचिन पायलट जो कि गुर्जर समाज के माने जाते हैं, उन्हें बुला लेती हैं तो हालात और बिगड़ सकते हैं। हाटी को एसटी का दर्जा दिए जाने को लेकर कोली समाज भी काफी नाराज चल रहा है। यही नहीं बीते 5 सालों में भले ही कोली समाज के प्रमुख नेताओं को सरकार में बड़े पद दिए गए हो, मगर आम जनता के लिए इनकी अनदेखी इस वर्ग को भी नाराज कर रही है। भाजपा में ब्राह्मण वोट बैंक को लेकर भी इतनी अच्छी स्थिति नहीं है।
इसकी बड़ी वजह कुछ पुराने ब्राह्मण भाजपाई चेहरे बगावत पर हैं। इन सब समीकरणों के बावजूद दोनों प्रत्याशियों ने अपनी पूरी ताकत अपने ही दम पर विधानसभा क्षेत्र में लगाई हुई है। दोनों की स्थिति हर पल हर दिन घट-बढ़ रही है। कराए गए विकास को लेकर और जारी किए गए डॉ राजीव बिंदल के घोषणा पत्र का जादू जनता की जुबान पर भरपूर चल रहा है। यही नहीं, दबी जुबान में कांग्रेस के कुछ नेता भी कह रहे हैं कि इस विधानसभा क्षेत्र में विकास तो हुआ है। बरहाल देखना यह होगा कि 12 तारीख के आखिरी 2 दिन कितनी कयामत ढाएंगे।

