ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों पर रेलगाड़ी दौड़ते देखना सभी को अच्छा लगता है। हरे-भरे पहाड़ों में खूबसूरत नजारों के बीच से निकलती ट्रेन में बैठने का अपना ही एक मजा होता है। पहाड़ों में ट्रेन दौड़ते हुए देखने का पहाड़ियों का सपना बहुत जल्द पूरा होने वाला है, यह देश के लिए भी एक बड़ी खुशखबरी है।
दरअसल, उत्तराखंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट चारधाम योजना के ऋषिकेश से कर्णप्रयाग रेल लाइन में पैकेज 7 ए (7A) के पोर्टल 2 में एस्केप टनल का निर्माण कार्य आखिरकार मंगलवार को पूरा हो गया है। यहां लगभग 400 से अधिक कर्मचारी कार्यरत थे, जो दिन-रात इस कार्य को कर रहे हैं।
नरकोटा से खांकरा के बीच परियोजना की यह ऐसी पहली टनल है, जो पूरी तरह बनकर तैयार हो चुकी है। टनल को तैयार होने में 521 दिन का समय लगा।
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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की खासियत पर एक नजर डाली जाये तो इसकी कुल लागत 16216 करोड़ रुपये है।
वर्ष 2019 में कार्य शुरू हुआ, वर्ष 2025 तक पूर्ण करने का लक्ष्य
17 सुरंगों से होकर गुजरेगी, इसमें से 105 कि.मी लाइन
सबसे लंबी सुंरग 14.08 किमी (देवप्रयाग से जनासू के बीच)
सबसे छोटी सुरंग 200 मीटर (सिवाई से कर्णप्रयाग के बीच)
11 सुरंगों की लंबाई छह किमी से अधिक
परियोजना के तहत 13 स्टेशन बनने हैं, जिसके तहत वीरभद्र, योग नगरी ऋषिकेश, शिवपुरी, व्यासी, देवप्रयाग, जनासू, मलेथा, श्रीनगर (चौरास), धारी देवी, रुद्रप्रयाग (सुमेरपुर), घोलतीर, गौचर व कर्णप्रयाग (सेवई) शामिल है।
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