HNN/शिलाई
गांव शिल्ला में स्थित प्रचीन महासू मंदिर में हर्षोल्लास के साथ कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। कलश यात्रा प्राचीन महासू मंदिर परिसर से शुरू होकर महासू पवित्र जल तक पहुंची तथा महासू जल उठाकर वापस मंदिर परिसर में पहुंचकर संपन्न हुई।

यात्रा में बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालुओं ने पीले वस्त्र पहन कर व सिर पर कलश धारण कर शामिल हुई। महासू मंदिर में कलश लेकर पहुंची। महिलाओं ने मंदिर प्रांगण में हर्षोल्लास के साथ रासा नृत्य व नाटी की। इससे पूर्व कथा स्थल महासू मंदिर प्रांगण में हवन पूजन किया गया। श्रीमद्भागवत यजमान बने नरेश चौहान द्वारा उठाई गई।
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पहले दिन कथा का वचन करते हुए कथावाचक दिव्य ज्योति जागृती संस्थान व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्य व्यास साधवी सुश्री गौरी भारती ने कथा का श्रवण करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा, ऐसी कथा है, जो जीवन के उद्देश्य एवं दिशा को दर्शाती है। इसलिए जहां भी भागवत कथा होती है, इसे सुनने मात्र से वहां का संपूर्ण क्षेत्र दुष्ट प्रवृत्तियों से खत्म होकर सकारात्मक उर्जा से सशक्त हो जाता है।
उन्होंने कहा कि कथा की सार्थकता तभी सिद्ध होती है, जब इसे हम अपने जीवन और व्यवहार में भी धारण करें। श्रीमद्भागवत कथा के श्रावण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है।
बता दें कि गिरिपार क्षेत्र के गांव शिल्ला में दिव्य ज्योति जागृति संस्थाओं द्वारा सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा किया गया है। क्षेत्र में पहली बार कथा में साध्विक बहनों द्वारा की जा रही है।
इस मौके पर पूर्व महिला मंडल प्रधान आशा देवी, वर्तमान महिला मंडल प्रधान बिमला देवी, नरेश चौहान, मुशी राम चौहान, साधुराम चौहान, ओमप्रकाश चौहान, बबलू चौहान सहित सैकड़ो समस्त ग्रामीण उपस्थित रहे।
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