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कांगड़ा / दक्षिण भारतीय शैली में सजा मलह माता सुकराला मंदिर, आस्था और पर्यटन का अनूठा संगम

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन 22 Mar 2026 Edited 22 Mar 1 min read

Himachalnow / धर्मशाला

शाहपुर के बोह क्षेत्र में स्थित 400 वर्ष पुरानी आस्था से जुड़ा भव्य मंदिर, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र , धर्मशाला क्षेत्र में स्थित मलह माता सुकराला विश्व कुल देवी मंदिर अपनी भव्यता, आस्था और अनूठी स्थापत्य शैली के कारण विशेष पहचान बना रहा है। यह मंदिर धार्मिक श्रद्धा के साथ-साथ पर्यटन के लिहाज से भी तेजी से उभरता केंद्र बनता जा रहा है।

धर्मशाला/शाहपुर-बोह (रूलहेड)

दक्षिण भारतीय शैली में निर्मित भव्य मंदिर

रूलहेड में स्थित यह मंदिर दक्षिण भारतीय मंदिरों की तर्ज पर निर्मित किया गया है, जो इसे हिमाचल के अन्य मंदिरों से अलग बनाता है। इसकी आकर्षक नक्काशी, भव्य शिल्पकला और अद्वितीय वास्तुकला श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी अपनी ओर खींचती है।

400 वर्ष पुरानी आस्था से जुड़ा इतिहास

मंदिर समिति के अध्यक्ष विजय शर्मा के अनुसार, लगभग 400 वर्ष पूर्व गौतम ब्राह्मण वंशज माता सुकराला जी के विरावल (जम्मू) स्थित मंदिर से त्रिशूल लेकर बोह पहुंचे थे। उस समय मंदिर निर्माण का संकल्प तो लिया गया, लेकिन यह कार्य तत्काल पूरा नहीं हो पाया। बाद में पृथ्वीराज शर्मा और उनके वंशजों ने श्रद्धालुओं के सहयोग से इस संकल्प को साकार करते हुए वर्ष 2022 में मंदिर निर्माण कार्य पूर्ण किया।

उड़ीसा के कारीगरों की बेजोड़ शिल्पकारी

मंदिर की भव्यता में उड़ीसा के कुशल कारीगरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिन्होंने इसकी नक्काशी और शिल्प निर्माण को विशेष रूप दिया। निर्माण में चंबा से लाए गए पत्थरों का उपयोग किया गया है, जिससे मंदिर में दक्षिण भारतीय शैली की झलक स्पष्ट दिखाई देती है।

माता की महिमा से जुड़ी चमत्कारिक कथा

लोक मान्यता के अनुसार, एक बार चंबा के राजा ने माता की शक्ति की परीक्षा ली थी। कहा जाता है कि उसी समय मंदिर परिसर के पास खड़ा सूखा लसूड़े का पेड़ अचानक हरा-भरा हो गया, जिससे माता की महिमा दूर-दूर तक फैल गई और श्रद्धालुओं की आस्था और मजबूत हुई।

तीन स्वरूपों में विराजमान हैं माता

मंदिर में माता सुकराला जी के साथ माता काली और माता सरस्वती के स्वरूप भी स्थापित हैं। श्रद्धालु यहां तीनों स्वरूपों के दर्शन कर सुख-समृद्धि, शक्ति और ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

प्राकृतिक सौंदर्य के बीच आध्यात्मिक शांति

मंदिर के समीप स्थित बोह घाटी का झरना इस स्थान की सुंदरता को और अधिक आकर्षक बनाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु न केवल पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि प्राकृतिक वातावरण में शांति और सुकून का अनुभव भी करते हैं।

धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में बढ़ती पहचान

मलह माता सुकराला मंदिर आज आस्था, संस्कृति और स्थापत्य कला का अद्भुत संगम बन चुका है। आने वाले समय में यह स्थल कांगड़ा क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकता है।

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