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हिमाचल बोर्ड नौवीं-10वीं परीक्षा पैटर्न में करेगा बदलाव, प्रश्नपत्रों में बढ़ेंगे क्षमता आधारित सवाल

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 7 May 2026 • 1 Min Read

Himachalnow / धर्मशाला

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड कक्षा नौवीं और दसवीं की परीक्षा प्रणाली में बदलाव की तैयारी कर रहा है। बोर्ड की नई योजना के तहत प्रश्नपत्रों में 20 से 30 प्रतिशत क्षमता आधारित प्रश्न शामिल किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और विषय की व्यावहारिक समझ का मूल्यांकन करना होगा।

धर्मशाला

परीक्षा प्रणाली में बदलाव की तैयारी

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड अपनी मूल्यांकन प्रणाली में बदलाव की दिशा में कार्य कर रहा है। इसी उद्देश्य से धर्मशाला में कक्षा नौवीं और दसवीं के सभी विषयों के लिए तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। बोर्ड अध्यक्ष डा. राजेश शर्मा ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक संतुलित, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाना है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों की केवल लिखित तैयारी ही नहीं, बल्कि विषय की समझ, तार्किक क्षमता और अवधारणात्मक स्पष्टता का भी मूल्यांकन किया जाएगा। कार्यशाला में विभिन्न शिक्षा विशेषज्ञों और विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया तथा मूल्यांकन प्रणाली से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।

सीबीएसई और आईसीएसई पैटर्न का किया गया अध्ययन

कार्यशाला के दौरान हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के प्रश्नपत्रों की तुलना देश के अन्य प्रमुख शिक्षा बोर्डों जैसे सीबीएसई और आईसीएसई के परीक्षा पैटर्न से की गई। बोर्ड अध्यक्ष डा. राजेश शर्मा के अनुसार बोर्ड के पाठ्यक्रम, ब्लूप्रिंट और मार्किंग स्कीम का विस्तृत अध्ययन किया गया है ताकि नई मूल्यांकन प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर के मानकों के अनुरूप तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं और राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक चुनौतियों के लिए बेहतर रूप से तैयार करना है। इसके साथ ही प्रश्नपत्र निर्माण और मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने पर भी चर्चा की गई।

20 से 30 प्रतिशत होंगे क्षमता आधारित प्रश्न

नई व्यवस्था के तहत भविष्य में प्रश्नपत्रों में 20 से 30 प्रतिशत प्रश्न क्षमता आधारित शामिल किए जाएंगे। बोर्ड के अनुसार ये प्रश्न विद्यार्थियों की तार्किक सोच, विश्लेषण क्षमता और विषय की व्यावहारिक समझ का परीक्षण करेंगे। ऐसे प्रश्नों का उद्देश्य केवल उत्तर याद करने की प्रक्रिया से आगे बढ़कर विषय की वास्तविक समझ का आकलन करना होगा। इसके लिए मॉडल प्रश्नपत्र तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि विद्यार्थियों और शिक्षकों को नए परीक्षा पैटर्न के अनुरूप तैयारी करने में सुविधा मिल सके। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि आगामी प्रश्नपत्र परख टेक्सोनॉमी के मानकों के अनुसार तैयार किए जाएंगे।

मॉडल पेपर और नई मार्किंग स्कीम पर फोकस

शिक्षा बोर्ड की ओर से मॉडल प्रश्नपत्रों और नई मार्किंग स्कीम पर भी कार्य किया जा रहा है। बोर्ड का कहना है कि नई प्रणाली के तहत प्रश्नपत्रों को इस प्रकार तैयार किया जाएगा ताकि विद्यार्थियों की विषय आधारित समझ और अनुप्रयोग क्षमता का सही मूल्यांकन हो सके। इसके अलावा शिक्षकों को भी नई मूल्यांकन प्रक्रिया के अनुरूप प्रशिक्षण देने की योजना बनाई जा रही है। बोर्ड के अनुसार आने वाले समय में परीक्षा प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि विद्यार्थियों को नई व्यवस्था के अनुसार तैयारी का पर्याप्त समय मिल सके।

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