सुक्खू सरकार ने आईएएस और आईएफएस कैडर घटाने का प्रस्ताव भेजा, आईपीएस समीक्षा भी संभव
Himachalnow / शिमला
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में बदलाव के तहत आईएएस और आईएफएस अधिकारियों के कैडर में कटौती का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। राज्य सरकार का कहना है कि संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और वित्तीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह प्रक्रिया शुरू की गई है।
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आईएएस कैडर में कटौती का प्रस्ताव
हिमाचल प्रदेश सरकार ने अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के कैडर को तर्कसंगत बनाने की दिशा में प्रक्रिया शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों की संख्या में कमी का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। वर्तमान में राज्य में आईएएस अधिकारियों का स्वीकृत कैडर 153 है, जिसे घटाकर 147 करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मानना है कि प्रशासनिक ढांचे और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार अधिकारियों की संख्या को संतुलित करना आवश्यक है।
आईएफएस कैडर में भी प्रस्तावित बदलाव
राज्य सरकार ने भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारियों के स्वीकृत पदों में भी बदलाव का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। वर्तमान में आईएफएस अधिकारियों का स्वीकृत कैडर 114 पदों का है, जिसे घटाकर 83 करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सूत्रों के अनुसार इस प्रस्ताव पर केंद्र स्तर पर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। सरकार का कहना है कि विभागीय आवश्यकताओं और कार्यभार के आधार पर यह प्रस्ताव तैयार किया गया है।
आईपीएस कैडर की समीक्षा पर भी विचार
राज्य सरकार आने वाले समय में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों के कैडर की समीक्षा पर भी विचार कर रही है। सरकार का कहना है कि उपलब्ध अधिकारियों के प्रभावी उपयोग और प्रशासनिक कार्यों के बेहतर संचालन के लिए कैडर संरचना की समीक्षा की जा रही है। इसके तहत विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली, आवश्यकताओं और वित्तीय पक्ष का अध्ययन किया जा रहा है।
प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं का अध्ययन
सरकार के अनुसार प्रस्ताव तैयार करने से पहले प्रशासनिक, वित्तीय और कार्यात्मक पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया गया है। राज्य सरकार का कहना है कि आवश्यकता से अधिक पदों के कारण वित्तीय बोझ बढ़ता है, जबकि उपलब्ध संसाधनों का संतुलित उपयोग प्रशासनिक दृष्टि से आवश्यक माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार एक आईएएस या आईएफएस अधिकारी पर प्रतिवर्ष लगभग 45 से 50 लाख रुपए तक का खर्च आता है। सरकार का मानना है कि प्रस्तावित बदलावों के बाद बचाए गए संसाधनों का उपयोग जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों में किया जा सकेगा।
केंद्र सरकार को भेजा गया विस्तृत प्रस्ताव
राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार को भेजे गए प्रस्ताव में विभिन्न प्रशासनिक और वित्तीय आधार शामिल किए गए हैं। सरकार का कहना है कि प्रस्ताव को व्यावहारिक आवश्यकता और मौजूदा प्रशासनिक संरचना के अनुसार तैयार किया गया है। केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद आगामी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।