HNN/ शिमला
क्रिप्टो करंसी स्कैम को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने करोड़ों रुपए सॉफ्टवेयर तैयार करवाने पर खर्च किए। सूत्रों के अनुसार, सॉफ्टवेयर तैयार करने में मेरठ निवासी एक इंजीनियर की संलिप्तता उभर कर सामने आ रही है, ऐसे में जांच टीम आरोपी की धरपकड़ को लेकर संभावित स्थानों पर तलाश कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, शातिर आरोपियों ने 4 से 5 सॉफ्टवेयर के साथ ही कई फर्जी वेबसाइट तैयार की थीं। समय-समय पर उन्हें अपग्रेड किया, जिस पर करीब 4 करोड़ रुपए खर्च किए। पूरे स्कैम से जुड़ा रिकाॅर्ड जांच टीम पहले ही जुटा चुकी है।
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एसआईटी का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी ठगी मामले में चार अन्य कंपनियां बनाई हैं। सॉफ्टवेयर का प्रशिक्षण लेने के सिलसिले में इंजीनियर कई बार दुबई भी गया है। इसके बाद आरोपी ने डिजिटल करेंसी का पूरा खेल समझा। भारत लौटकर सॉफ्टवेयर तैयार किया।
दोगुना रिटर्न के लालच में लोगों के समक्ष डिजिटल करेंसी का ऐसा जाल बुना गया कि वे इनके झांसे में आते गए। लोगों ने पैसा डबल करने के लालच में निवेश करना शुरू कर दिया। बता दें क्रिप्टोकरेंसी ठगी मामले में अभी और भी गिरफ्तारियां होनी हैं। कई आरोपी पुलिस की गिरफ्तारी के डर से भूमिगत हुए हैं। ऐसे में पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है।
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