Himachalnow / नाहन
खरमास को हिंदू धर्म में अशुभ अवधि माना जाता है, जब शुभ-मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। इस दौरान सूर्य गुरु की राशि (धनु या मीन) में गोचर करते हैं, जिससे खरमास की शुरुआत होती है।
आइए समझते हैं, खरमास का महत्व, इसकी अवधि और इस समय किन कार्यों से बचना चाहिए।
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खरमास 2024-2025 की शुरुआत और समाप्ति
15 दिसंबर 2024 से खरमास की शुरुआत हो गयी है। इस दिन सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे।
खरमास 15 दिसंबर से 14 जनवरी 2025 तक रहेगा। इसके बाद मकर संक्रांति (14 जनवरी 2025) के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे और खरमास समाप्त हो जाएगा।
महत्वपूर्ण तिथियां:
- सूर्य का धनु राशि में गोचर: 15 दिसंबर 2024
- मकर संक्रांति पर सूर्य का मकर राशि में प्रवेश: 14 जनवरी 2025
- खरमास की कुल अवधि: 30 दिन
खरमास में शुभ कार्य क्यों वर्जित हैं?
खरमास के दौरान शुभ कार्यों पर रोक के पीछे ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताएं हैं:
- सूर्य का प्रभाव: सूर्य जब गुरु की राशि (धनु या मीन) में प्रवेश करते हैं, तो गुरु की शुभता कमजोर हो जाती है।
- धनु राशि का अग्नि तत्व: ज्योतिष के अनुसार, धनु राशि अग्नि तत्व की राशि है। सूर्य के इस राशि में आने से वातावरण और परिस्थितियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- कमजोर शुभ फल: इस समय किए गए शुभ कार्यों का फल कम या अशुभ माना जाता है।
खरमास के दौरान वर्जित कार्य
खरमास के 30 दिनों में निम्नलिखित कार्य नहीं करने चाहिए:
1. विवाह और सगाई
खरमास के दौरान शादी-विवाह और सगाई जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। यह समय इन कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता।
2. गृह प्रवेश और निर्माण कार्य
नए घर का निर्माण, गृह प्रवेश या संपत्ति की खरीदारी खरमास में नहीं करनी चाहिए।
3. नया बिजनेस या प्रोजेक्ट शुरू करना
कोई नया व्यवसाय, बड़ा निवेश या प्रोजेक्ट शुरू करने से बचें।
4. मुंडन और अन्य संस्कार
बच्चों के मुंडन और अन्य धार्मिक संस्कार भी इस दौरान नहीं किए जाते।
क्या करना चाहिए खरमास के दौरान?
खरमास का समय धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है:
- इस अवधि में ध्यान, पूजा-पाठ और भक्ति करें।
- भगवान सूर्य की आराधना और दान-पुण्य करना शुभ होता है।
- समाजसेवा और जरूरतमंदों की सहायता करें।
खरमास के ज्योतिषीय पहलू
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सूर्य का गुरु की राशि में प्रवेश वातावरण और ऊर्जा को प्रभावित करता है।
- मौसम का बदलाव: इस समय ठंड और गर्मी के बीच मौसम में बदलाव देखा जाता है।
- सूर्य-गुरु का तालमेल: सूर्य की अग्नि ऊर्जा और गुरु की शुभता का संतुलन बिगड़ता है, जिससे मांगलिक कार्यों पर रोक लगाई जाती है।
खरमास के बाद शुभ कार्यों की शुरुआत
खरमास समाप्त होने के बाद मकर संक्रांति (14 जनवरी 2025) से शुभ कार्य फिर से शुरू हो सकते हैं।
- विवाह, गृह प्रवेश, और नए कार्यों के लिए मकर संक्रांति के बाद का समय शुभ रहेगा।
- अगर आप किसी बड़े काम की योजना बना रहे हैं, तो मकर संक्रांति के बाद इसे शुरू करना बेहतर रहेगा।
निष्कर्ष
खरमास 2024-2025 की अवधि 15 दिसंबर 2024 से 14 जनवरी 2025 तक रहेगी। यह समय शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है, लेकिन आध्यात्मिक उन्नति और धार्मिक कार्यों के लिए बेहद शुभ है।
इस अवधि में धैर्य रखें और शुभ कार्यों के लिए मकर संक्रांति का इंतजार करें।
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