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गिरीपार में माघी त्योहार की तैयारियां पूरी, दी जाएगी हजारों बकरों की बलि

SAPNA THAKUR • 9 Jan 2023 • 1 Min Read

HNN/ नाहन

सिरमौर जनपद की सदियों पुरानी लोक संस्कृति व परंपराओं को संजोए रखने के लिए मशहूर गिरीपार क्षेत्र में साल का सबसे खर्चीला व शाही कहलाने वाला माघी त्योहार आरम्भ होने वाला है।‌ बर्फ अथवा कड़ाके की ठंड से प्रभावित रहने वाली गिरीपार अथवा ग्रेटर सिरमौर की विभिन्न पंचायतों में दिसंबर माह की शुरुआत से ही मांसाहारी लोग अन्य दिनों से ज्यादा मीट खाना शुरु कर देते हैं।

मगर माघी त्योहार के दौरान क्षेत्र के मांसाहारी परिवारों द्वारा बकरे काटे जाने की परंपरा भी अब तक कायम है। जिला सिरमौर के समूचे गिरीपार क्षेत्र में 11 जनवरी से माघी त्योहार मनाया जाएगा। इस त्योहार में बकरों को काटा जाता है, जिसकी संख्या हजारों में पहुंच जाती है। इस त्योहार में लोगों का हर्षोल्लास देखते ही बनता है। इस वक्त यहां के लोगों ने त्योहार की तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि 12 महीनों में 12 त्योहार मनाए जाते हैं, लेकिन माघी त्योहार हमारी पारंपरिक संस्कृति से जुड़ा हुआ है, इसलिए लोग इसकी विशेष तैयारी करते हैं। सिरमौर के ऊपरी क्षेत्र में माघी त्योहार की खूब धूम रहती है। बता दें कि माघी त्योहार के पहले दिन हजारों बकरों की बलि दी जाती है, जिसे भातियोज कहा जाता है। इसकी तैयारी प्रत्येक परिवार सालभर करता है। सालभर बकरों को पाला जाता है।

पहले दिन बुशतो मनाया जाता है और दूसरे दिन भातियोज मनाया जाता है। दूसरे दिन ही बकरों को काटा जाता है और तीसरे दिन को “हतको” कहा जाता है। हालांकि बदलते समय के साथ यह त्योहार अधिक खर्चीला हो चला है। यह त्योहार गिरीपार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है और इस दिवस को मनाने के लिए लोग ऋण तक लेते है, परंतु फिर भी इस त्योहार को मनाना गिरीपार के लोग अपनी साख और लाज का प्रश्न बना देते हैं।

क्यों मनाया जाता है माघी त्योहार
पौराणिक कथाओं के अनुसार, पूरे क्षेत्र में सैकड़ों वर्ष पूर्व मां काली के रथ टूटते थे। इससे असंख्य लोग काल के ग्रास बन जाते थे। इस दौरान महामारी भी फैलती थी। इससे बचने के लिए माघी के दिन सैकड़ों बकरों को काटकर मां काली को प्रसन्न किया जाता था। इसलिए भातियोज के दिन गिरीपार की पंचायतों में 30 हजार से ज्यादा बकरे काटे जाते हैं।