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चूड़धार के जंगल में रास्ता भटके उत्तराखंड के 21 श्रद्धालु, किए रेस्क्यू

PARUL 20 Jun 2024 Edited 20 Jun 1 min read

करीब छह घंटे तक जंगल में भटके श्रद्धालुओं को पुलिस ने रात 11ः00 बजे सुरक्षित पहुंचाया चूड़धार

HNN/नाहन

जिला सिरमौर की सबसे ऊंची चोटी चूड़धार के जंगल में बीती देर शाम 21 श्रद्धालु रास्ता भटक गए। सभी यात्री सुरक्षित हैं, जिन्हें पुलिस जवानों ने देर रात 11ः00 चूड़धार पहुंचाया। यात्रियों का ये दल उत्तराखंड से चूड़धार यात्रा से निकला था, लेकिन रास्ते में खराब मौसम और गहरी धुंध के चलते श्रद्धालु रास्ता भटक गए। बताया जा रहा है कि श्रद्धालु 6 घंटे जंगल में भटकते रहे।

जानकारी के मुताबिक बुधवार को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के चकरोता क्षेत्र से करीब दो दर्जन श्रदालुओं का दल चौपाल क्षेत्र के सराह के रास्ते से चूड़धार के लिए रवाना हुआ था। दल में 80 वर्षीय बुजुर्ग जगत शर्मा भी अपने पोते के साथ घर से चूड़धार के लिए रवाना हुए थे। शाम करीब पांच बजे अचानक मौसम खराब हुआ। इस बीच पूरा जंगल धुंध की आगोश में समा गया।

इससे यात्री रास्ता भटक गए। काफी समय तक श्रद्धालु जंगल में भटकते रहे। इसकी सूचना चूड़ेश्वर सेवा समिति के सदस्यों को मिली। चूड़ेश्वर सेवा समिति के सदस्यों ने इस बारे तुरंत पुलिस को सूचित किया। लिहाजा, चूड़धार मे तैनात पुलिस के जवान आरक्षी अखिल चौहान व आरक्षी मनोहर चौहान बिना किसी देरी के जंगल की ओर निकल पड़े। रास्ता भटकने के कारण श्रद्धालु सराहन के रास्ते से तराह के जंगल में पहुंच गए थे।

पुलिस के जवानों ने सभी 21 श्रद्धालुओं को अलग रास्तों से रेस्क्यू करके देर रात करीब 11ः00 बजे चूड़धार पहुंचा दिया। चूड़ेश्वर सेवा समिति के प्रबंधक बाबूराम शर्मा ने सभी यात्रियों से अपील की है कि कोई भी यात्री खराब मौसम व रात के समय चूड़धार की यात्रा न करें। बरसात शुरू होने वाली है और रास्ते में धुंध होने के चलते अकसर श्रद्धालु रास्ता भटक जाते हैं। ऐसे में मौसम को देखते हुए ही लोग यात्रा पर निकलें।

80 वर्षीय बुजुर्ग के हौंसले की तारीफ

रास्ता भटके इस दल में शामिल 80 वर्षीय बुजुर्ग के हौंसले की तारीफ की जा रही है। दरअसल, भटकने के बाद दल के अन्य सदस्यों को बुजुर्ग जगत राम की तबीयत बिगड़ने की चिंता सता रही थी, लेकिन बुजुर्ग ने हिम्मत नहीं हारी। वह काफी थक गए थे। लिहाजा, पुलिस के जवानों ने चार किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई में उन्हें पीठ पर उठा कर चूड़धार तक पहुंचाया।

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