छह साल की साधना, 28 की उम्र में बने डॉक्टर
भनोग के लोकेश शर्मा ने संस्कृत में हासिल की पीएचडी, राजगढ़ का बढ़ाया गौरव
हिमाचल नाऊ न्यूज राजगढ़
मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। इस कहावत को सच कर दिखाया है राजगढ़ मंडल के भनोग गांव निवासी 28 वर्षीय लोकेश शर्मा ने। छह वर्षों की कठिन शोध-साधना, निरंतर अध्ययन और अथक मेहनत के बाद लोकेश ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के संस्कृत विभाग से पीएचडी (विद्यावारिधि) की प्रतिष्ठित उपाधि हासिल कर ली है। उनकी इस उपलब्धि से भनोग गांव ही नहीं, बल्कि पूरे राजगढ़ क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है।
कम उम्र में हासिल की गई यह सफलता उनकी प्रतिभा, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण की मिसाल है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में यह मुकाम हासिल करना क्षेत्र के युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है।
वर्तमान में डॉ. लोकेश शर्मा हिमाचल प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। शैक्षणिक क्षेत्र में उनकी सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह कई बार यूजीसी-नेट और राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं। इसके अलावा इंडोनेशिया और मॉरीशस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सम्मेलनों में भी अपने शोध-पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं।
संस्कृत जैसे प्राचीन और समृद्ध विषय में शोध के माध्यम से उन्होंने अकादमिक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। छह वर्षों तक लगातार शोध कार्य में जुटे रहना और इसके साथ अपने व्यावसायिक दायित्वों का निर्वहन करना उनकी मेहनत और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
डॉ. लोकेश शर्मा की इस उपलब्धि पर उनके पैतृक गांव भनोग सहित राजगढ़ क्षेत्र में खुशी का माहौल है। क्षेत्रवासियों ने उन्हें बधाई देते हुए उम्मीद जताई है कि वह भविष्य में भी संस्कृत भाषा, शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देंगे।
लोकेश की सफलता ने एक बार फिर साबित किया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या संसाधनों की मोहताज नहीं होती। गांव की मिट्टी से निकलकर भी अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच तक पहुंचा जा सकता है।