Category: Rajghar

  • नेहरू मैदान में अंतर विभागीय क्रिकेट प्रतियोगिता का भव्य समापन, पुलिस विभाग ने जीता खिताब

    नेहरू मैदान में अंतर विभागीय क्रिकेट प्रतियोगिता का भव्य समापन, पुलिस विभाग ने जीता खिताब

    राजगढ़ के नेहरू मैदान में आयोजित अंतर विभागीय क्रिकेट प्रतियोगिता का समापन उत्साह के साथ हुआ। पुलिस विभाग ने प्राथमिक शिक्षा विभाग को हराकर ट्रॉफी अपने नाम की।

    राजगढ़

    फाइनल में पुलिस विभाग की शानदार जीत

    राजगढ़ उपमंडल के ऐतिहासिक नेहरू मैदान में आयोजित तीन दिवसीय अंतर विभागीय क्रिकेट प्रतियोगिता का समापन रविवार को उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। फाइनल मुकाबला हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग और प्राथमिक शिक्षा विभाग के बीच खेला गया, जिसमें पुलिस विभाग की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सात विकेट से जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया। पुलिस विभाग ने इस प्रतियोगिता में दूसरी बार विजय हासिल की है।

    सुनील बने मैन ऑफ द मैच और सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज

    फाइनल मुकाबले में पुलिस विभाग के खिलाड़ी सुनील ने घातक गेंदबाजी करते हुए चार विकेट झटके, जिसके लिए उन्हें मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया। पूरे टूर्नामेंट में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर सुनील को सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज का खिताब भी प्रदान किया गया।

    रूपेश बने मैन ऑफ द सीरीज

    उद्यान विभाग के खिलाड़ी रूपेश ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए मैन ऑफ द सीरीज का पुरस्कार जीता। उन्हें प्रतियोगिता का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज भी घोषित किया गया।

    सेमीफाइनल मुकाबलों का विवरण

    इससे पूर्व खेले गए सेमीफाइनल मुकाबलों में पुलिस विभाग ने उच्च शिक्षा विभाग को हराया, जबकि प्राथमिक शिक्षा विभाग ने राजस्व विभाग को पराजित कर फाइनल में प्रवेश किया।

    समापन समारोह में अतिथियों की उपस्थिति

    समापन समारोह में स्थानीय समाजसेवी सुरेश शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि रजनीश शर्मा और जयपाल ठाकुर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। अतिथियों ने विजेता और उपविजेता टीमों को ट्रॉफी एवं पुरस्कार वितरित किए तथा खिलाड़ियों की खेल भावना और अनुशासन की सराहना की।

    चार वर्षों से जारी है प्रतियोगिता

    उपमंडल राजगढ़ में यह अंतर विभागीय क्रिकेट प्रतियोगिता पिछले चार वर्षों से अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के सौजन्य से आयोजित की जा रही है। महासंघ अध्यक्ष अरुण शर्मा ने बताया कि प्रतियोगिता का उद्देश्य विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच समन्वय, सौहार्द और टीम भावना को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि आयोजन के माध्यम से समाज को नशे के खिलाफ जागरूक करने का संदेश भी दिया जा रहा है।

    उन्होंने प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए महासंघ पदाधिकारियों, आयोजन समिति, खिलाड़ियों तथा सहयोगियों के योगदान की सराहना की।

  • धमुन–हाब्बन सड़क बदहाल, 15 दिन में काम न हुआ तो चक्का जाम की चेतावनी

    धमुन–हाब्बन सड़क बदहाल, 15 दिन में काम न हुआ तो चक्का जाम की चेतावनी

    राजगढ़ उपमंडल के डिम्मन क्षेत्र में धमुन–हाब्बन सड़क की खराब स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया है। 15 दिन में सुधार कार्य शुरू न होने पर चक्का जाम की चेतावनी दी गई है।

    राजगढ़

    ग्रामीणों ने मंत्री को भेजा ज्ञापन

    राजगढ़ उपमंडल के डिम्मन क्षेत्र में धमुन–हाब्बन सड़क की बदहाली को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। दर्जनों ग्रामीणों ने नायब तहसीलदार राजगढ़ के माध्यम से लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह को ज्ञापन भेजकर सड़क की खस्ताहालत से अवगत कराया और 15 दिन के भीतर काम शुरू न होने पर चक्का जाम की चेतावनी दी है।

    अधिशासी अभियंता से भी की मुलाकात

    इससे पहले ग्रामीण लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता से भी मिले और सड़क की बदतर स्थिति पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।

    1972 में बना मार्ग, अब तक नहीं हुआ पक्का

    स्थानीय निवासी कमल शर्मा ने बताया कि धमुन से हाब्बन सड़क का निर्माण वर्ष 1972 में हुआ था, लेकिन 55 वर्षों में सड़क को पक्का नहीं किया गया। प्रतिदिन बसों और छोटे वाहनों की आवाजाही से कच्ची सड़क और अधिक जर्जर हो चुकी है।

    बरसात के बाद हालात और बिगड़े

    बरसात के बाद हालात और खराब हो गए हैं। कई स्थानों पर दो-दो फीट गहरे गड्ढे बन चुके हैं। कुछ हिस्सों में लगभग 60 डिग्री तक तीखी चढ़ाई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी बस या भारी वाहन का एक्सल या टायर क्षतिग्रस्त हो जाए तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

    औपचारिक मरम्मत का आरोप

    लोगों ने आरोप लगाया कि बरसात के बाद केवल औपचारिक रूप से मलबा हटाया गया, ताकि वाहन किसी तरह निकल सकें। कुछ समय के लिए तीन-चार मल्टीटास्क कर्मियों को तैनात किया गया था, लेकिन पिछले चार महीनों से उन्हें अन्य स्थानों पर भेज दिया गया है।

    सफर में बढ़ा जोखिम

    ग्रामीणों ने कहा कि कहीं सड़क में गड्ढे हैं तो कहीं गड्ढों में सड़क नजर आती है। कई जगह सड़क इतनी तंग हो चुकी है कि आम लोगों के साथ-साथ स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को भी भारी जोखिम उठाकर सफर करना पड़ रहा है।

    चक्का जाम की चेतावनी

    ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर सड़क की मरम्मत और सुधार कार्य शुरू नहीं हुआ तो सनोरा में मुख्य सड़क मार्ग को अवरुद्ध कर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके लिए विभाग को पहले ही आगाह कर दिया गया है।

  • सनौरा–नेरीपुल–छैला सड़क को 200 करोड़ की सैद्धांतिक मंजूरी

    सनौरा–नेरीपुल–छैला सड़क को 200 करोड़ की सैद्धांतिक मंजूरी

    संघर्ष समिति ने जताया आभार, निर्माण शुरू होने पर गुणवत्ता जांच का ऐलान

    राजगढ़

    सनौरा–नेरीपुल–छैला सड़क के विस्तारीकरण के लिए करीब 200 करोड़ रुपये की सैद्धांतिक मंजूरी मिलने पर संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है। कांगू जुबड़ी में पूर्व जिला परिषद सदस्य विनय भगनाल और महेंद्र हाब्बी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में पझौता व रासूमांदर क्षेत्र के सैकड़ों लोग शामिल हुए।

    बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और प्रदेश सरकार के प्रति आभार प्रकट किया गया। मंजूरी की खुशी में संघर्ष समिति सदस्य अरुण ठाकुर द्वारा भूतेश्वर महादेव कांवती के नाम पर भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

    विनय भगनाल और महेंद्र हाब्बी ने कहा कि यह सड़क अपर शिमला के सेब उत्पादकों के लिए जीवनरेखा है। इसी मार्ग से सेब देश की विभिन्न मंडियों तक पहुंचता है। उन्होंने बताया कि सड़क की बदहाल स्थिति के कारण सेब सीजन में दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

    लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क को नौ टन भार क्षमता के अनुसार तैयार किया गया, जबकि इस मार्ग पर 30 से 40 टन क्षमता के ट्राले चलते हैं, जिससे सड़क बार-बार क्षतिग्रस्त होती रही।उन्होंने वर्ष 2020 में तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में कुम्हारहट्टी–ओच्छघाट–सनौरा–नेरीपुल–छैला सड़क के सुधार के लिए स्वीकृत 46 करोड़ रुपये का भी उल्लेख किया।

    निजी कंपनी द्वारा 2021-22 में की गई टायरिंग तीन माह में उखड़ गई थी। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद कंपनी को दोबारा कार्य करना पड़ा।संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि नए प्रोजेक्ट के तहत जब निर्माण कार्य शुरू होगा तो समिति स्वयं गुणवत्ता की निगरानी करेगी, ताकि स्वीकृत राशि का दुरुपयोग न हो।

    लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से परियोजना को शीघ्र अंतिम स्वीकृति दिलाकर कार्य प्रारंभ करने का आग्रह भी किया गया। साथ ही इस सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा दिलाने की मांग दोहराई गई।

    बैठक में रूपेंद्र चौहान, जितेंद्र कुमार, निशु पुंडीर, रिंकू ठाकुर, अरुण ठाकुर, दिनेश ठाकुर, रोहित बंटी, नीटू हाब्बी, गोविंद ठाकुर, राजेश ठाकुर, ओमप्रकाश राणा, देवेंद्र ठाकुर, रिंकू जसटा, अशोक ठाकुर सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

  • राजगढ़ में तीन आरोपी चिट्टा सहित गिरफ्तार, 1.66 ग्राम हेरोइन बरामद

    राजगढ़ में तीन आरोपी चिट्टा सहित गिरफ्तार, 1.66 ग्राम हेरोइन बरामद

    हिमाचल नाऊ न्यूज राजगढ़

    पुलिस थाना राजगढ़, जिला सिरमौर की टीम ने मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए तीन व्यक्तियों को हेरोइन/चिट्टा सहित गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 1.66 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया है।
    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कशिश भरोटा निवासी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी संजौली, शिमला, रूब्बल जदेईक निवासी गांव पंडरोग तथा निक्षित चौहान निवासी गांव पुडग, तहसील कोटखाई, जिला शिमला के रूप में हुई है।
    पुलिस चौकी पझौता, थाना राजगढ़ की टीम ने 8 फरवरी को गश्त के दौरान गुप्त सूचना के आधार पर शरगांव के पास एक वाहन संख्या HP-99-8880 को रोका। तलाशी के दौरान वाहन में सवार तीनों व्यक्तियों के कब्जे से 1.66 ग्राम हेरोइन/चिट्टा बरामद किया गया।

    इस मामले में पुलिस थाना राजगढ़ में आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 व 29 के तहत अभियोग दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है।

    मामले की पुष्टि करते हुए जिला सिरमौर के पुलिस अधीक्षक निश्चिंत सिंह नेगी ने बताया कि नशे के खिलाफ पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है और ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

  • लोकगीतों के सुरों में सिरमौर की संस्कृति को संजो रहे हैं राजेश धाल्टा

    लोकगीतों के सुरों में सिरमौर की संस्कृति को संजो रहे हैं राजेश धाल्टा

    पांच वर्षों से पारंपरिक लोकसंगीत के संरक्षण में जुटे युवा कलाकार, मंच से अकादमिक दुनिया तक बना रहे पहचान

    हिमाचल नाऊ न्यूज – राजगढ़

    तेजी से बदलते सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश में जब लोकसंगीत आधुनिक धुनों की भीड़ में पीछे छूटता नजर आ रहा है, ऐसे समय में सिरमौर की पारंपरिक संस्कृति को सहेजने का जिम्मा एक युवा कलाकार ने अपने कंधों पर उठा लिया है।

    राजगढ़ क्षेत्र से जुड़े राजेश धाल्टा आज सिरमौर के उन चुनिंदा कलाकारों में शुमार हो चुके हैं, जो लोकगीतों के संरक्षण और संवर्धन को एक सतत सांस्कृतिक अभियान का रूप दे रहे हैं।

    सांस्कृतिक मंचों पर राजेश धाल्टा की सुरीली आवाज जब गूंजती है, तो श्रोता सिर्फ गीत नहीं सुनते, बल्कि सिरमौर की मिट्टी, उसकी लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ जाते हैं। यही कारण है कि उनकी प्रस्तुति के दौरान बार-बार ‘वनसमोर’ की मांग सुनाई देती है।

    राजेश बीते करीब पांच वर्षों से सिरमौर जिले के पारंपरिक लोकगीतों की खोज, संकलन और मंचीय प्रस्तुति में सक्रिय हैं। उनका उद्देश्य मनोरंजन से आगे बढ़कर उन लोकगीतों को संरक्षित करना है, जो समय के साथ विलुप्त होने की कगार पर हैं।

    वे मानते हैं कि लोकगीत किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान होते हैं और इन्हें बचाना आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है।

    राजेश धाल्टा आकाशवाणी और दूरदर्शन शिमला से अनुमोदित कलाकार हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, जिला और ग्रामीण स्तर के मेलों में अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से सिरमौर की लोकसंस्कृति को व्यापक मंच दिया है।

    कम उम्र में ही उन्हें देश के विभिन्न राज्यों में सिरमौर की संस्कृति पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत करने के अवसर मिले, जिससे जिले की सांस्कृतिक पहचान को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार मिला।

    राजेश मूल रूप से राजगढ़ से सटे कन्हैच गांव के निवासी हैं। संगीत उन्हें पारिवारिक विरासत में मिला है। उनके पिता सोहनलाल धाल्टा उच्च कोटि के बांसुरी और शहनाई वादक हैं, जबकि उनके चाचा विद्यादत्त धाल्टा ऑलराउंड कलाकार के रूप में पहचाने जाते हैं।

    ऐसे सांस्कृतिक वातावरण में पले-बढ़े राजेश के लिए संगीत जीवन का स्वाभाविक हिस्सा बन गया।
    राजेश की प्रारंभिक शिक्षा मडियाघाट स्कूल में हुई। बचपन से ही वे पाठशाला स्तर की सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे और लगातार प्रथम स्थान हासिल करते रहे।

    पुरस्कारों से भरा उनका घर उनकी लगन और निरंतर अभ्यास की कहानी कहता है।
    उन्होंने राजगढ़ महाविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की, जहां प्रो. डॉ. सविता सहगल के मार्गदर्शन में संगीत की औपचारिक शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से संगीत में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त कर उन्होंने अपनी शैक्षणिक यात्रा को भी मजबूती दी।

    राजेश धाल्टा का सपना केवल मंच तक सीमित नहीं है। वे संगीत विषय में प्रोफेसर बनकर लोकसंगीत को अकादमिक पहचान दिलाना चाहते हैं। इसके लिए वे निरंतर मेहनत कर रहे हैं और संगीत में पीएचडी करना उनका दीर्घकालीन लक्ष्य है। उनका मानना है कि लोकसंगीत को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाए बिना उसका स्थायी संरक्षण संभव नहीं है।

    राजेश अपने पिता सोहनलाल और चाचा विद्यादत्त धाल्टा के साथ युगलवंदी में कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं, जो दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहते हैं। इसके साथ-साथ वे हारमोनियम, ढोलक, तबला और गिटार जैसे वाद्य यंत्रों में भी दक्षता रखते हैं।

    सोहनलाल धाल्टा द्वारा स्थापित ‘धाल्टा कला मंच’ के तहत एक पहाड़ी बैंड भी सक्रिय है, जिसमें परिवार से जुड़े कलाकारों की प्रमुख भागीदारी है। इस बैंड की मांग सिरमौर के साथ-साथ सोलन और शिमला जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी लगातार बढ़ रही है, जिससे स्थानीय कलाकारों को मंच और रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

    लोकगीतों के माध्यम से संस्कृति को संजोने की राजेश धाल्टा की यह साधना आज नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनती जा रही है। उनका यह प्रयास साबित करता है कि परंपरा और आधुनिकता के संतुलन से ही सांस्कृतिक विकास संभव है।

  • एनईपी–2020 पर राष्ट्रीय ऑनलाइन उन्मुखीकरण कार्यक्रम, देशभर से 150 शिक्षाविदों की सहभागिता

    एनईपी–2020 पर राष्ट्रीय ऑनलाइन उन्मुखीकरण कार्यक्रम, देशभर से 150 शिक्षाविदों की सहभागिता

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित आठ दिवसीय ऑनलाइन कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। देश के अलग-अलग राज्यों से शिक्षाविदों, शोधार्थियों और अकादमिक प्रशासकों ने इसमें भाग लिया।

    सिरमौर/राजगढ़

    राष्ट्रीय स्तर का अकादमिक आयोजन
    हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के यूजीसी–एमएमटीटीसी और इटरनल विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 पर आधारित आठ दिवसीय ऑनलाइन उन्मुखीकरण एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 150 शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने पंजीकरण कर सक्रिय भागीदारी की।

    विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
    कार्यक्रम के दौरान प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने एनईपी–2020 के प्रमुख आयामों पर विस्तार से चर्चा की। उच्च शिक्षा में नवाचार, भारतीय ज्ञान परंपरा, बहुविषयक शिक्षा और समग्र विकास जैसे विषयों पर प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया गया।

    आठ दिनों तक चले अकादमिक सत्र
    कार्यक्रम के तहत प्रतिदिन ऑनलाइन सत्र आयोजित किए गए, जिनमें शिक्षकों और अकादमिक प्रशासकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सत्रों का उद्देश्य नई शिक्षा नीति की अवधारणाओं को व्यवहारिक रूप में समझाना और शिक्षण–अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना रहा।

    शिक्षा क्षेत्र में समन्वय का उदाहरण
    यह आयोजन विश्वविद्यालयों के बीच अकादमिक सहयोग और समन्वय का उदाहरण बना। आयोजकों ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

  • पहाड़ की मेहनत ने तोड़ा नेट का दायरापुन्नरधार की सरीना ने यूजीसी नेट पास कर रचा मिसाल

    पहाड़ की मेहनत ने तोड़ा नेट का दायरापुन्नरधार की सरीना ने यूजीसी नेट पास कर रचा मिसाल

    हिमाचल नाऊ न्यूज राजगढ़

    पुन्नरधार की एक साधारण बेटी ने असाधारण संकल्प के बल पर बड़ी शैक्षणिक सफलता हासिल की है। निरंतर प्रयास और कड़ी मेहनत के दम पर सरीना कुमारी ने वाणिज्य विषय में यूजीसी नेट (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा) उत्तीर्ण कर रेणुका और राजगढ़ क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

    उनकी इस सफलता से न केवल परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र में गर्व और खुशी का माहौल है।
    सरीना मूल रूप से नौहराधार तहसील के गांव पुन्नरधार की निवासी हैं। उनके पिता राजेन्द्र सिंह राजगढ़ बाजार में दुकान चलाते हैं, जबकि माता राधा देवी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में सेवाएं दे रही हैं।

    सीमित संसाधनों के बीच सरीना की यह उपलब्धि क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है।
    सरीना ने बताया कि उनका जीवन लक्ष्य वाणिज्य विषय में प्रोफेसर बनना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने बिना किसी कोचिंग के यूजीसी नेट परीक्षा की तैयारी की और सफलता की पहली बड़ी सीढ़ी पार की।

    शैक्षणिक सफर की बात करें तो सरीना ने वर्ष 2019 में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला राजगढ़ से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद वर्ष 2022 में राजकीय महाविद्यालय राजगढ़ से बीकॉम की डिग्री हासिल की।

    आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला से वर्ष 2025 में वाणिज्य विषय में स्नातकोत्तर डिग्री (एमकॉम) उत्तीर्ण की।
    सरीना की इस उपलब्धि पर शिक्षकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह परिणाम उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास का प्रतिफल है।

    शिक्षकों के अनुसार सरीना की सफलता अन्य विद्यार्थियों को भी उच्च लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

    सरीना की यूजीसी नेट में सफलता पर क्षेत्रवासियों, शुभचिंतकों और सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार बधाइयां दी जा रही हैं। यह उपलब्धि साबित करती है कि मजबूत इरादों और निरंतर परिश्रम से पहाड़ी क्षेत्रों की बेटियां भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।

  • बिना कोचिंग शैलेन्द्र ने प्रथम प्रयास में पास की नेट परीक्षा

    बिना कोचिंग शैलेन्द्र ने प्रथम प्रयास में पास की नेट परीक्षा

    पझौता घाटी के युवक की सफलता, संगीत में सहायक प्रोफेसर बनने का सपना

    हिमाचल नाऊ न्यूज राजगढ़

    राजगढ़ उपमंडल की पझौता घाटी के लिए यह गर्व का क्षण है। क्षेत्र के गांव मानवा निवासी शैलेन्द्र हितैषी ने बिना किसी कोचिंग के प्रथम प्रयास में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) उत्तीर्ण कर समूची घाटी का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी की लहर है।

    शैलेन्द्र हितैषी ने बताया कि उन्होंने नेट परीक्षा की तैयारी पूरी तरह स्वअध्ययन के माध्यम से की। किसी भी कोचिंग संस्थान की सहायता लिए बिना घर पर नियमित अध्ययन और अनुशासन के साथ तैयारी कर यह सफलता हासिल की।

    शैलेन्द्र मूल रूप से राजगढ़ उपमंडल की पझौता घाटी के गांव मानवा के निवासी हैं। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा आठवीं तक अपने पैतृक गांव मानवा से प्राप्त की। इसके बाद राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला राजगढ़ से 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की। स्नातक की पढ़ाई उन्होंने राजगढ़ डिग्री कॉलेज से पूरी की।

    संगीत के प्रति शैलेन्द्र की रुचि बचपन से रही है। उन्हें संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपनी माता मीरा हितैषी से मिली, जो आकाशवाणी से अनुमोदित पहाड़ी कलाकार रह चुकी हैं। उनके पिता सुखदेव हितैषी पेशे से किसान हैं।

    कॉलेज शिक्षा के दौरान भी शैलेन्द्र ने संगीत विषय को अनिवार्य रूप से चुना। स्नातक के बाद वह वर्तमान में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से संगीत में एमए कर रहे हैं। नेट परीक्षा में सफलता का श्रेय उन्होंने अपने माता-पिता, परिवार के सहयोग के साथ-साथ राजगढ़ कॉलेज की संगीत प्रोफेसर डॉ. सविता सहगल और नीरजा सहगल को दिया है।

    शैलेन्द्र ने बताया कि उनका सपना संगीत विषय में सहायक प्रोफेसर बनना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने दिन-रात मेहनत कर नेट परीक्षा उत्तीर्ण की। आगे उनका उद्देश्य संगीत में पीएचडी कर सिरमौर की प्राचीन संस्कृति और पारंपरिक लोकगीतों के संरक्षण के लिए कार्य करना है।

  • सनौरा–नेरीपुल सड़क के लिए 200 करोड़ की मंजूरी, कांग्रेस–भाजपा में श्रेय लेने की होड़

    सनौरा–नेरीपुल सड़क के लिए 200 करोड़ की मंजूरी, कांग्रेस–भाजपा में श्रेय लेने की होड़

    सीआरआईएफ के तहत मिली सैद्धांतिक स्वीकृति, सड़क की गुणवत्ता को लेकर पुराने अनुभवों ने बढ़ाई चिंता

    राजगढ़

    सड़क सुधार को मिली बड़ी स्वीकृति
    राजगढ़ उपमंडल से गुजरने वाली कुम्हारहट्टी–यशवंतनगर–नेरीपुल–छैला सड़क के सुधारीकरण के लिए भारत सरकार के भूतल परिवहन मंत्रालय द्वारा सीआरआईएफ के तहत 200 करोड़ रुपये की सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद कांग्रेस और भाजपा में श्रेय लेने की होड़ मच गई है। हालांकि इस सड़क के लिए भाजपा कार्यकाल के दौरान कोई डीपीआर तैयार नहीं की गई थी, इसके बावजूद केंद्र से मंजूरी मिलते ही श्रेय लेने की राजनीति शुरू हो गई है।

    डीपीआर के आधार पर मिली स्वीकृति
    लोक निर्माण विभाग मंडल राजगढ़ के अधिशासी अभियंता पवन गर्ग के अनुसार विभाग ने वर्ष 2024 में इस सड़क के सुधारीकरण के लिए डीपीआर तैयार कर राज्य सरकार को भेजी थी, जिसके आधार पर केंद्र सरकार ने 200 करोड़ रुपये की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की है। उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत नेरीपुल से सनौरा तक लगभग 37 किलोमीटर सड़क को पक्का किया जाएगा तथा तंग मोड़ों को चौड़ा किया जाएगा।

    छोटे पुलों के निर्माण का भी प्रस्ताव
    परियोजना में पैरवी खड्ड, जघेड़ नाला और बझेतु खड्ड पर तीन छोटे पुलों के निर्माण का भी प्रस्ताव है। यह सड़क सेब सीजन के दौरान अत्यधिक दुर्घटनाओं के लिए जानी जाती है। कई स्थानों पर तंग मोड़ों के कारण ओवरलोड ट्रक अनियंत्रित होकर गिरि नदी में गिर चुके हैं। प्रशासन द्वारा इस हिस्से को दुर्घटना संभावित क्षेत्र घोषित किया गया है।

    पहले भी उठ चुके हैं गुणवत्ता पर सवाल
    गौरतलब है कि इससे पहले भी इस सड़क के सुधारीकरण के लिए 46 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। वर्ष 2020 में एक निजी कंपनी को सड़क पक्का व चौड़ा करने का कार्य सौंपा गया, लेकिन कंपनी द्वारा की गई टायरिंग मात्र तीन माह में ही उखड़ गई थी। भारी विरोध के बाद कंपनी को दोबारा टायरिंग करनी पड़ी, जिससे इस परियोजना की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

    डिजाइन क्षमता से अधिक भार बड़ी समस्या
    लोक निर्माण विभाग की डीपीआर के अनुसार यह सड़क केवल 9 टन भार क्षमता वाले वाहनों के लिए डिजाइन की गई थी, जबकि सेब सीजन में इस मार्ग पर 30 से 40 टन क्षमता वाले ट्रॉलों की आवाजाही जारी रहती है। इसी कारण सड़क बार-बार क्षतिग्रस्त होती रही है।

    स्थानीय लोगों ने गुणवत्ता पर जोर दिया
    अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या 200 करोड़ रुपये की नई मंजूरी से सड़क की वास्तविक काया पलट होगी या फिर पिछली परियोजना की तरह यह राशि भी गुणवत्ताहीन कार्यों की भेंट चढ़ जाएगी। उल्लेखनीय है कि छैला–नेरीपुल–सनौरा–ओच्छघाट–कुम्हारहट्टी सड़क एक ऑल वेदर रोड है, जिसके माध्यम से अपर शिमला का सेब देश की विभिन्न मंडियों तक पहुंचता है। इसके बावजूद सरकार ने इस मार्ग को स्टेट हाईवे से घटाकर मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड का दर्जा दे रखा है। अधिशासी अभियंता के अनुसार 200 करोड़ की मंजूरी के बाद भी सड़क का दर्जा एमडीआर ही रहेगा।

    राजगढ़ ब्लॉक के लोगों का कहना है कि राजनीतिक दलों को श्रेय लेने की राजनीति छोड़कर निर्माण की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए, अन्यथा अतीत की तरह करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद भी सड़क की हालत में कोई ठोस सुधार नहीं होगा।

  • बेलुए बुरा आया जमाना” पहाड़ी नाटी पर बधोरली उत्सव में झूमे दर्शक

    बेलुए बुरा आया जमाना” पहाड़ी नाटी पर बधोरली उत्सव में झूमे दर्शक

    राजेश धाल्टा और अन्य कलाकारों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां, नववर्ष पर हुआ भव्य सांस्कृतिक आयोजन

    हिमाचल नाऊ न्यूज राजगढ़

    नववर्ष के उपलक्ष्य पर शिरगुल युवा क्लब के सौजन्य से आयोजित बधोरली उत्सव में पहाड़ी संस्कृति की शानदार झलक देखने को मिली। उभरते युवा कलाकार राजेश धाल्टा ने “बेलुए बुरा आया जमाना, दिल देखी रो लाणा” नामक पहाड़ी नाटी प्रस्तुत कर पूरे पंडाल को झूमने पर मजबूर कर दिया।

    सांस्कृतिक उत्सव में धाल्टा कला मंच के कलाकारों के अलावा प्रसिद्ध कलाकार राजेश धाल्टा, मधुमिता धीमान और सुमन सोनी सहित अन्य कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति देकर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

    मधुमिता धीमान ने “तू तो बसी गोई दिल दी मेरे प्यारिए, हाय रे मेरिए जोनसारिए” गीत पर प्रस्तुति दी, जिस पर युवा वर्ग भावुक होकर झूमता नजर आया।

    कार्यक्रम का शुभारंभ सेवानिवृत्त शिक्षक प्रेमपाल आर्य ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर जीवन सिंह राणा और सुशील भृगु विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम को पहलवान सोहनलाल शर्मा द्वारा प्रायोजित किया गया, जिनका आयोजन समिति की ओर से भव्य स्वागत किया गया।

    समापन समारोह में सेवानिवृत्त बीपीईओ चेतराम शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उनके साथ स्नेह शर्मा, डिंपल शर्मा, ग्राम पंचायत प्रधान संध्या धीमान, नीलकमल शर्मा और राजेश शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

    आयोजन समिति द्वारा सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
    मुख्य अतिथि चेतराम शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि पहाड़ी गीतों और नाटियों से हिमाचल प्रदेश की देशभर में अलग पहचान है।

    ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों से युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है, जिससे प्रदेश की सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होता है।

    शिरगुल युवा क्लब के प्रधान पवन शर्मा ने बताया कि यह सांस्कृतिक कार्यक्रम बीते कई वर्षों से निरंतर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान किया जाता है।

    उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए क्षेत्र की जनता और सहयोगियों का आभार जताया। आयोजन के दौरान उपस्थित लोगों के लिए भंडारे की भी व्यवस्था की गई थी।