HNN / कुल्लू
प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी मजहबी एकता के प्रतीक सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरु गुरुनानक देव जी का 553वां प्रकासोत्सव बड़े हर्षोल्लास व धूमधाम से जिला में श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। यह जानकारी गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा अखाड़ा बाजार के प्रधान महेंद्र चावला ने दी। उन्होंने कहा कि उत्सव के मद्देनजर गुरुद्वारा अखाड़ा बाजार में रविवार को श्री अखण्ड पाठ आरम्भ किये गए। आज नगर कीर्तन के रूप में संगत द्वारा भव्य रूप में गुरु ग्रन्थ साहिब की पालकी फूलों से सुसज्जित कर प्रातः 11:30 बजे रामशिला से ढालपुर तक शब्द कीर्तन गायन कर ले जाई जाएगी।
इस दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा जल पान का इंतजाम किया जाएगा। मंगलवार प्रातः 9 बजे श्री अखण्ड पाठ का भोग डाला जाएगा व 10:30 से 5 बजे सायं तक रागी हरप्रीत सिंह प्रीत लुधियाना वाले कीर्तन गायन कर संगत को निहाल करेंगे। दोपहर बाद श्रद्धालुओं के लिए गुरु का लंगर भी चलाया जाएगा। महेंद्र चावला ने कहा कि गुरु नानक देव जी सिखों के पहले गुरु थे। अंधविश्वास और आडंबरों के कट्टर विरोधी गुरु नानक का प्रकाश उत्सव (जन्मदिन) कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है हालांकि उनका जन्म 15 अप्रैल 1469 को हुआ था।
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पंजाब के तलवंडी नामक स्थान में एक किसान के घर जन्मे नानक के मस्तक पर शुरू से ही तेज आभा थी। नानक ने घर बार छोड़ बहुत दूर दूर के देशों में भ्रमण किया जिससे उपासना का सामान्य स्वरूप स्थिर करने में उन्हें बड़ी सहायता मिली। अंत में कबीरदास की ‘निर्गुण उपासना’ का प्रचार उन्होंने पंजाब में आरंभ किया और वे सिख संप्रदाय के आदिगुरु हुए। गुरु नानक देवजी ने जात−पांत को समाप्त करने और सभी को समान दृष्टि से देखने की दिशा में कदम उठाते हुए ‘लंगर’ की प्रथा शुरू की थी। लंगर में सब छोटे−बड़े, अमीर−गरीब एक ही पंक्ति में बैठकर भोजन करते हैं।
आज भी गुरुद्वारों में उसी लंगर की व्यवस्था चल रही है, जहां हर समय हर किसी को भोजन उपलब्ध होता है। इस में सेवा और भक्ति का भाव मुख्य होता है। नानक देव जी का जन्मदिन गुरु पूर्व के रूप में मनाया जाता है। तीन दिन पहले से ही प्रभात फेरियां निकाली जाती है।
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