HNN/कुल्लू
जिले में सोमवार को सायर पर्व मनाया जाएगा। उत्सव की तैयारियां पूरी हो गई हैं। सोमवार को देवी-देवताओं को जूब (एक विशेष प्रकार की घास) दी जाएगी। इसके बाद बड़ों को जूब देने का सिलसिला शुरू होगा। घर-घर जूब बांटी जाएगी। जूब देने वाले आने वाली बच्चों की टोलियों को अखरोट आदि भेंट करेंगे।
सायर पर्व कुल्लू का प्राचीन पर्व है। कुल्लू में इसे बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दौरान घरों में मेहमानाें के लिए पारंपरिक पकवान बनाए जाएंगे। घी, सिड्डू, भल्ले आदि घरों में बनाए जाएंगे। पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू से पूरी घाटी महक उठेगी। मेहमानों के आने-जाने का सिलसिला ग्रामीण क्षेत्रों में दिनभर चलेगा।सायर संक्रांति के साथ ही जिले में सोयरी मेलों का आगाज हो जाएगा।
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जिला मुख्यालय के साथ लगते कराड़सू क्षेत्र में सोयरी मेले में सोमवार को लोगों की भीड़ उमड़ेगी। तांदला गांव में सोमवार को सोयरी मेला शुरू होगा। यहां भी तीन दिन मेले की धूम रहेगी। मणिकर्ण घाटी के पड़ेई, ब्यासर आदि जगहों में भी सोयरी मेले की शुरुआत होगी।
जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर का कहना है कि सायर पर्व पर सबसे पहले ईष्ट देवताओं की पूजा-अर्चना होगी। वहीं देवालयों में भी देवी-देवताओं की विशेष पूजा की जाएगी। ईष्ट देवताओं को जूब समर्पित करने के बाद ही घरों में जूब बांटने का सिलसिला शुरू होगा। संवाद न्यूज़ को अच्छे से चेंज कर कर पैराग्राफ में तीन पैरों मेंबनाकर भेजें
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