उत्तराखंड के जोशीमठ में स्थिति गंभीर बनी हुई है। सोमवार शाम को भी इमारतों को हुए नुक्सान का जायजा लेने के लिए केंद्र की एक टीम यहां पहुंची थी। वहीँ, जोशीमठ में भू-धंसाव के चलते असुरक्षित हो चुके भवनों को गिराने का अभियान आज मंगलवार से शुरू होगा। उधर, राज्य सरकार ने जोशीमठ को तीन जोन में बांटने का फैसला किया है। ये जोन होंगे- डेंजर, बफर और सेफ जोन। जोन के आधार पर शहर के मकानों को चिह्नित किया जाएगा।
डेंजर जोन में ऐसे मकान होंगे जो ज्यादा जर्जर हैं और रहने लायक नहीं हैं। ऐसे मकानों को मैन्युअली गिराया जाएगा, जबकि सेफ जोन में वैसे घर होंगे जिनमें हल्की दरारें हैं और जिसके टूटने की आशंका बेहद कम है। वहीं, बफर जोन में वो मकान होंगे, जिनमें हल्की दरारें हैं, लेकिन दरारों के बढ़ने का खतरा है। बता दें कि यहां घरों की दीवारों पर गहरी-गहरी दरारें हैं, सड़कें धंसती जा रही हैं और जमीन पर जगह-जगह से जमीन फाड़ कर पानी निकल रहा है।
यहां पहले चरण में 678 मकानों और 2 होटलों को असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। लोगों से जगह खाली करने के लिए कहा जा रहा है। घरों पर लाल खतरे वाले निशानों ने स्थानीय लोगों के चेहरे का रंग उड़ा दिया है। उधर, मुख्य सचिव डॉ.एसएस संधु ने असुरक्षित भवनों को गिराने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) के वैज्ञानिकों की देखरेख में लोनिवि की टीम भवनों को ढहाने का काम करेगी, दोनों संस्थानों की टीमें जोशीमठ पहुंच गई हैं। असुरक्षित भवनों पर लाल निशान लगा दिए गए हैं।
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