इस चुनावी साल में सरकार ने हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के गिरी पार क्षेत्र की जनता को बड़ी सौगात दी है। जी हां, गिरी पार क्षेत्र के तकरीबन तीन लाख की आबादी वाले हाटी समुदाय को आज आखिरकार अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिल ही गया है। बता दें कि, आर्थिक और विकास के पिछड़ेपन से छुटकारा पाने के लिए गिरीपार क्षेत्र के साढ़े तीन लाख हाटी समुदाय के लोग अपने आप को जनजातीय घोषित करवाने के लिए पिछले कई वर्षाें से संघर्ष कर रहे थे।
इन लोगों का तर्क था कि अगर इन्हें जनजाति का दर्जा मिल जाता है तो इससे क्षेत्र में विकास के कार्यों को गति मिलेगी साथ ही समुदाय के लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी खुलेंगे। जिसके बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष भी उठाया गया। जिसके बाद केंद्र सरकार ने इस मामले पर गंभीरता से चिंतन किया।
इतना ही नहीं जेपी नड्डा जिला सिरमौर के नाहन दौरे पर पहुंचे थे उन्होंने भी हाटी समुदाय के लोगों को आश्वस्त किया था कि जल्द ही उन्हें जनजातिय दर्जा मिल जाएगा। बड़ी बात यह है कि आज हाटी समुदाय की दशकों पुरानी यह मांग पूरी हो गई है। जी हाँ, आज केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई जिसमें हिमाचल के ट्रांसगिरी क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने का ऐलान हुआ। इस फैसले की घोषणा अनुसूचित जाति व जनजाति विकास मामले के मंत्री अर्जुन मुंडा ने की है।
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इस दौरान केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर भी मौजूद रहे। पत्रकार वार्ता के दौरान अर्जुन मुंडा ने कहा कि हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने से 1,60,000 लोग लाभान्वित होंगे। इसके साथ ही गिरी पार क्षेत्र के हाटी समुदाय के लोगों की कई दशकों पुरानी मांग पूरी हो गई है जिससे उन में खुशी की लहर है।
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