पौष माह हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह महीना सूर्य के धनु राशि में रहने के कारण धार्मिक कार्यों, व्रतों और पूजा-पाठ के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस महीने में सूर्य देव की आराधना करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं। इसके अलावा, दान-पुण्य और धर्म-कर्म करने के लिए भी पौष माह को अत्यधिक फलदायी माना गया है।
पौष माह की शुरुआत 16 दिसंबर 2024 से हो रही है, और इस दौरान कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि पौष माह में कौन से प्रमुख व्रत और त्योहार आने वाले हैं और इस महीने का धार्मिक महत्व क्या है।
पौष माह के प्रमुख व्रत और त्योहार
1. संकष्टी गणेश चतुर्थी
- तिथि: बुधवार, 18 दिसंबर 2024
- यह व्रत विशेष रूप से गणेश जी की पूजा के लिए है।
2. कालाष्टमी
- तिथि: रविवार, 22 दिसंबर 2024
- यह व्रत कालरात्रि देवी की पूजा करने के लिए किया जाता है।
3. क्रिसमस और मदन मोहन मालवीय जयंती
- तिथि: बुधवार, 25 दिसंबर 2024
- यह दिन ईसाई धर्म के प्रमुख पर्व क्रिसमस के रूप में मनाया जाता है, साथ ही मदान मोहन मालवीय की जयंती भी है।
4. सफला एकादशी
- तिथि: गुरुवार, 26 दिसंबर 2024
- यह व्रत विशेष रूप से विष्णु पूजा के लिए होता है।
5. प्रदोष व्रत
- तिथि: शनिवार, 28 दिसंबर 2024
- यह व्रत भगवान शिव की पूजा के लिए किया जाता है।
6. मासिक शिवरात्रि
- तिथि: रविवार, 29 दिसंबर 2024
- मासिक शिवरात्रि का व्रत शिव भक्तों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है।
7. सोमवार अमावस्या और सोमवार व्रत
- तिथि: सोमवार, 30 दिसंबर 2024
- यह व्रत विशेष रूप से सोमवार को किया जाता है और इसके महत्व का संबंध विशेष रूप से शिव पूजा से है।
8. नव वर्ष और चंद्र दर्शन
- तिथि: बुधवार, 01 जनवरी 2025
- नव वर्ष का स्वागत और चंद्र दर्शन विशेष रूप से इस दिन के आयोजन होते हैं।
9. वरद चतुर्थी
- तिथि: शुक्रवार, 03 जनवरी 2025
- यह व्रत खासतौर पर गणपति बप्पा की पूजा के लिए किया जाता है।
10. षष्ठी
- तिथि: रविवार, 05 जनवरी 2025
- यह व्रत विशेष रूप से संतान सुख की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है।
11. गुरु गोबिंद सिंह जयंती
- तिथि: सोमवार, 06 जनवरी 2025
- यह सिख धर्म के गुरु गोबिंद सिंह की जयंती होती है।
12. दुर्गाष्टमी व्रत
- तिथि: मंगलवार, 07 जनवरी 2025
- यह व्रत विशेष रूप से माँ दुर्गा की पूजा करने के लिए है।
13. वैकुंठ एकादशी और पौष पुत्रदा एकादशी
- तिथि: शुक्रवार, 10 जनवरी 2025
- यह व्रत वैकुंठ द्वार की पूजा के लिए मनाया जाता है।
14. कूर्म द्वादशी और प्रदोष व्रत
- तिथि: शनिवार, 11 जनवरी 2025
- यह व्रत भगवान विष्णु और शिव की पूजा के लिए होता है।
15. राष्ट्रीय युवा दिवस और स्वामी विवेकानंद जयंती
- तिथि: रविवार, 12 जनवरी 2025
- यह दिन स्वामी विवेकानंद की जयंती और राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
16. पौष पूर्णिमा, माघ स्नान प्रारंभ, और लोहड़ी (लोहरी)
- तिथि: सोमवार, 13 जनवरी 2025
- पौष पूर्णिमा के दिन माघ स्नान का प्रारंभ होता है, साथ ही लोहड़ी का त्यौहार भी मनाया जाता है।
पौष माह का नामकरण
पौष माह का नामकरण हिंदू पंचांग के अनुसार हुआ है। प्राचीन समय में, हमारे मनीषियों ने यह व्यवस्था की थी कि, जिस महीने की पूर्णिमा को चंद्रमा जिस नक्षत्र में रहेगा, उसी के आधार पर उस महीने का नाम रखा जाएगा। पौष माह के दौरान, चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में रहता है, जिसके कारण इस महीने का नाम पौष पड़ा है।
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यह हिंदू कैलेंडर का 10वां महीना है और इस महीने में सूर्य उपासना का विशेष महत्व होता है। इसके अलावा, आध्यात्मिक रूप से इस महीने का महत्व और भी बढ़ जाता है। योग और ध्यान करने वालों के लिए यह महीना खास होता है, क्योंकि इस समय ध्यान करने से आंतरिक शांति और अलौकिक अनुभव मिल सकते हैं।
पौष माह का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
- सूर्य उपासना: इस महीने में सूर्य देव की पूजा करना विशेष फलदायी होता है।
- धर्म-कर्म: इस माह में दान और पुण्य कार्यों का बड़ा महत्व है।
- आध्यात्मिक उन्नति: इस महीने में योग और ध्यान से आंतरिक शांति मिल सकती है।
इस तरह, पौष माह का समय न केवल धार्मिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण होता है, बल्कि यह आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी शुभ समय होता है।
निष्कर्ष: पौष माह हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इस महीने में कई व्रत और त्योहार आते हैं, जो विशेष रूप से धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए लाभकारी माने जाते हैं। सूर्य पूजा, योग और ध्यान इस महीने के महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल हैं।
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