धारा-118 के तहत संपत्ति लेने पर स्टांप ड्यूटी दोगुनी, अधिसूचना जारी
स्टांप ड्यूटी से बचने के लिए शातिर कर रहे हैं बिना रजिस्ट्री के पार्टनरशिप एक्सचेंज का बड़ा खेल
हिमाचल नाऊ न्यूज़ नाहन /शिमला
हिमाचल प्रदेश में धारा-118 के तहत जमीन लेने वालों को अब पहले से ज्यादा अपनी जेब ढीली करनी होगी। सरकार ने धारा-118 के तहत जमीन लेने पर ली जाने वाली स्टांप ड्यूटी को दोगुणा कर दिया है, यानी कि अब जमीन की लागत का कुल 12 फीसदी देना होगा।
असल में सरकार के द्वारा ऐसा इसलिए भी किया गया है क्योंकि 25 मार्च 2023से पहले सरकार को मिलने वाले स्टैंप रिवेन्यू को बचाते हुए पार्टनरशिप चेंज का फार्मूला इस्तेमाल कर रहे थे।
जबकि नॉन एग्रीकल्चरिस्ट गैर हिमाचली को भी 118 एचपी टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म एक्ट 1972 के तहत परमिशन लेना जरूरी होता है। मगर यह सब काम बिना परमिशन के ही पार्टनर शिप एक्सचेंज पर खेला जा रहा था।
इस तरह के मामले काला अंब औद्योगिक क्षेत्र में भी काफी हैं। जिसमें लॉर्ड कृष्णा इंडस्ट्रियल कंपनी, तथा एस सत्यम ऑटोइंडस्ट्रज जैसे मामले भी प्रमुख हैं। जिन में स्पष्ट रूप से भी आदेश दिए गए हैं कि 118 की परमिशन लेना जरूरी है।
एम एस सत्यम ऑटो इंडस्ट्री को डिपार्टमेंट ऑफ़ इंडस्ट्री केद्रा 4 -8- 22 के लेटर में स्पष्ट रूप से कहा भी गया है। इस कंपनी के मौजूदा हिस्सेदार का कहना है कि यह अधिसूचना 25 मार्च 2023को जारी हुई थी जबकि उनकी पर्टनर शिप 6 जून 2022 को चेंज हुई थी।
मगर अधिसूचना में स्पष्ट रूप से कहा गया है पार्टनरशिप एक्ट 1932 तभी मान्य होगा जब 118 की परमिशन ऑन रिकॉर्ड होगी।हैरानी तो इस बात की है कि इस मामले मे 118 की परमिशन नहीं ली गई है। जिसका डिटेल खुलास अगली खबर में किया जाएगा।
वही बता दे कि पहले यह स्टांप ड्यूटी 6 फीसदी थी।इसके अलावा, 2 फीसदी रजिस्ट्रेशन फीस भी अलग से देनी होती है। यह निर्णय राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया था, जिसके बाद कानून विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।
अब राज्य में जो भी मंजूरी धारा-118 के तहत दी जाएगी, उसमें खरीदार को जमीन के बाजार मूल्य पर 12 फीसदी स्टांप ड्यूटी देनी होगी।यह निर्णय राज्य सरकार द्वारा जमीन की कीमतों को नियंत्रित करने और जमीन की खरीद-फरोख्त में पारदर्शिता लाने के लिए लिया गया है।
इससे जमीन की कीमतों में वृद्धि पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी और जमीन की खरीद-फरोख्त में शामिल लोगों को अधिक सुरक्षा मिलेगी।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में जमीन की खरीद-फरोख्त के लिए धारा-118 के तहत मंजूरी लेना आवश्यक है। यह धारा जमीन की खरीद-फरोख्त को नियंत्रित करने और जमीन की कीमतों को स्थिर रखने के लिए बनाई गई है।
अब इस धारा के तहत जमीन लेने वालों को अधिक स्टांप ड्यूटी देनी होगी, जिससे जमीन की कीमतों में वृद्धि पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।