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नाहन में हजरत इमाम हुसैन की शहादत को किया गया याद

Ankita 29 Jul 2023 Edited 29 Jul 1 min read

मुस्लिम समुदाय द्वारा मुहर्रम के अवसर पर शहर में निकाले गए चार ताजिए

HNN/ नाहन

सिरमौर जिला के मुख्यालय नाहन में शनिवार को मुस्लिम समुदाय द्वारा मुहर्रम के अवसर पर शहर में ताजिए निकाल कर हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद किया गया। इस अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शहर के चार अलग-अलग हिस्सों से ताजिए निकाले।

इस अवसर पर पहला ताजिया गुन्नूघाट से निकाला गया जिसकी अगवाई सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने की। इस दौरान बच्चे, युवा व हर वर्ग के मुस्लिम लोग हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद कर रहे थे। इस अवसर पर विशेष तौर पर पुलिस बल भी तैनात किया गया था।

ताजियों का कारवां आगे बढ़ता गया तथा दूसरा ताजिया हरिपुर मोहल्ला से जुड़ते हुए लोगों की संख्या शहादत के इस मुहिम में जुड़ती गई। रानीताल के समीप पहुंचने पर तीन ताजिए शहादत को याद करते हुए एकत्रित हो गए।

ऑल हिमाचल मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के प्रदेश मुख्य सलाहकार नसीम मोहम्मद दीदान, राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष व लीगल एडवाइजर एडवोकेट शकील अहमद शेख व जिला मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के प्रधान कैप्टन सलीम अहमद ने बताया कि मुहर्रम का दिन हजरत इमाम हुसैन की शहादत के रूप में मनाया जाता है।

मानवता की सेवा करते करते हजरत इमाम हुसैन एक अत्याचारी, अन्यायी व अयोग्य शासक के खिलाफ इंसाफ की लड़ाई लड़ते-लड़ते करबला के युद्ध में 72 साथियों सहित जिसमें चार वर्षीय शबीना व छह महीने का हजरत अली असगर ने भी शहादत का जाम पिया था।

कैप्टन सलीम अहमद ने बताया कि मुहर्रम महीने की 10 तारीख हजरत इमाम हुसैन की शहादत का दिन याद करवाती है। उन्होंने कहा कि इस माह की पहली तारीख से इस्लाम वर्ष प्रारंभ होता है। नाहन शहर में आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई के लोगों ने सद्भावना, सुदृढ़ता व शांति का पैगाम देते हुए एकअनोखी मिसाल कायम की है।

गौर हो कि मुहर्रम का पर्व सिया समुदाय मनाता है, परंतु नाहन में रियासत काल से सुन्नी समुदाय मुहर्रम की परंपरा पूरी कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुहर्रम एक गम व मातम का महीना है। इससे पूर्व शहर में मोहल्ला हरिपुर, गुन्नूघाट, रानीताल से चार ताजिए शहर भरके भ्रमण पर निकले।

चारों ताजिए कच्चा टैंक, गौरा भवन, रानीताल से होते हुए जामा मस्जिद पहुंचे जहां पर सूर्यास्त होने पर ताजियों का जुलूस समाप्त किया गया। इस दौरान शहर के सभी धर्मों के लोगों ने मुहर्रम में भाग लिया।