पच्छाद में मौसम का कहर, ओलावृष्टि और तूफान ने तबाह की टमाटर-शिमला मिर्च की फसल
करोड़ों के नुकसान की आशंका, खेतों में बिछी नकदी फसलें, किसानों ने मांगा विशेष मुआवजा
हिमाचल नाऊ न्यूज़ पच्छाद
जिला सिरमौर के पच्छाद क्षेत्र में बेमौसमी बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। शुक्रवार शाम और शनिवार को बदले मौसम ने क्षेत्र की नकदी फसलों पर ऐसा कहर बरपाया कि कई गांवों में खेतों में खड़ी टमाटर और शिमला मिर्च की फसलें पूरी तरह बिछ गईं।
किसानों का दावा है कि नुकसान करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है।पच्छाद के सिरमौरी मंदिर, डिंगरी सरजेट, भैलन, डिंगरी धिनी, मढ़ीघाट, जयहर, शाडिया, शौटी, मासरिया और नारग समेत अनेक क्षेत्रों में तेज तूफान और ओलावृष्टि ने सबसे अधिक नुकसान टमाटर और शिमला मिर्च की फसलों को पहुंचाया।
कई स्थानों पर पौधों की टहनियां टूट गईं, जबकि तैयार हो रही फसल जमीन पर गिरकर खराब हो गई।किसानों का कहना है कि तीन से चार माह की मेहनत कुछ घंटों में बर्बाद हो गई। जिस फसल से उन्हें पूरे साल की आय की उम्मीद थी, वह अब तबाही के कगार पर पहुंच गई है। क्षेत्र के किसानों ने बताया कि एक सीजन में टमाटर और शिमला मिर्च की खेती पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं और अब उत्पादन शुरू होने से पहले ही फसल को भारी झटका लग गया है।
डिंगरी सरजेट के प्रताप सिंह, जितेंद्र ठाकुर और योगेंद्र सिंह, डिंगरी धिनी के कुलदीप ठाकुर, शौटी के हितेंद्र सिंह और वीरेंद्र सिंह तथा शाडिया के नरदेव ठाकुर सहित कई किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से तत्काल नुकसान का सर्वे करवाने तथा प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग उठाई है।
केवल सब्जी फसलें ही नहीं, बल्कि पच्छाद के बागवानों को भी इस मौसम की मार झेलनी पड़ी है। क्षेत्र में प्लम, आड़ू और कीवी की फसलों को भी नुकसान पहुंचने की सूचना है। बागवानी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का दायरा बड़ा निकला तो इसका असर स्थानीय मंडियों और बाजारों में भी दिखाई दे सकता है।
हालांकि मौसम की इस तबाही के बीच बारिश कुछ किसानों के लिए राहत भी लेकर आई है। लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों को खेतों में पर्याप्त नमी मिलने से मक्की की बिजाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हैं।
इसके अलावा अन्य खरीफ फसलों को भी इस बारिश से लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।उधर, बारिश के बाद तापमान में आई गिरावट से मैदानी क्षेत्रों के लोगों को भीषण गर्मी और लू से बड़ी राहत मिली है।
लेकिन पच्छाद के उन किसानों के लिए यह बारिश आफत बनकर आई है, जिनकी आजीविका पूरी तरह नकदी फसलों पर निर्भर है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और कृषि विभाग के नुकसान आकलन पर टिकी हुई हैं।