भामसं ने साधा निशाना : करोड़ों का राजस्व देने वाले बीबीएन खस्ता हाल में और सरकार नींद में
HNN/बद्दी
भारतीय मजदूर संघ ने आपदा से जूझ रहे उद्योगपतियों को राहत देने के लिए आवाज बुलंद की है। भामसं के राज्य उद्योग प्रभारी मेला राम चंदेल ने कहा कि आपदा से पूरा औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन जूझ रहा है। पुल और सडक़ों टूटने के कारण न तो उद्योगपति और न ही कामगार उद्योगों में पहुंच पा रहे हैं। बीबीएन की कनेक्टिवी देश के अन्य राज्यों से सही ढंग से न हो पाने के कारण न तो कच्चा माल आ रहा है और न ही तैयार माल बाहर जा पा रहा है।
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आपदा के बाद से उद्योगपति मुसीबत में हैं और पूरे औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में त्राही-त्राही मची है। लेकिन प्रदेश की कांग्रेस सरकार गहरी नींद में से रही है। न तो सडक़ों पुलों की दशा को सुधारने के लिए कोई कारगर कदम उठाए जा रहे हैं और न ही उद्यमियों को कोई राहत दी जा रही है। पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए भारतीय मजदूर संघ के उद्योग प्रभारी मेला राम चंदेल ने कहा कि हिमाचल बिजली का निर्माता है और सरकार को उद्योगपतियों को राहत देते हुए बिजली के दाम आधे करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि आपदा से जूझ रहे उद्योगों को स्थानीय नेता स्क्रैप, लेबर के काम के लिए धमका रहे हैं। 100 करोड़ से ज्यादा के जीएसटी के साथ साथ इनकम टैक्स सरकार को जा रहा है। करोड़ों रूपया सरकार को बिजली के बिल के रूप में जा रहा है। लेकिन सरकार ने एक बार भी सोने के अंडे देने वाले इस औद्योगिक क्षेत्र की सुध लेने की जहमत नहीं उठाई। प्रदेश के मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश में आपदा प्रभावितों को दिलासा देते घूम रहे हैं लेकिन एक बार भी उन्होंने बीबीएन के उद्योगपतियों को अपनी सूरत दिखाने की जहमत नहीं उठाई।
भामसं के जिला महामंत्री राजू भारद्वाज ने कहा कि आज बीबीएन में ठेकेदारी प्रथा का बोलबाला है। मजदूरों को सरकार की अधिसूचना के बाद भी न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा। प्रदेश का मॉडल अस्पताल ईएसआई काठा खुद बीमार पड़ा है, बेंटीलेटर पर है। अस्पताल में मशीनें खराब पड़ी हैं और डॉक्टरों की कमी है। हिमाचल को कोई भी अस्पताल ईएसआई से टाईअप नहीं है और कामगारों को बाहरी राज्यों के अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।
श्रम विभाग के पास कामगारों की सैंकड़ों शिकायतें हैं। लेकिन श्रम विभाग के अधिकारी उद्योगपतियों के वकील बनकर काम कर रहे हैं। भामसं ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर प्रदेश सरकार ने अगर उद्योगपतियों, कामगारों और इस औद्योगिक क्षेत्र की सुध नहीं ली तो मजबूरन भामसं को सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार सडक़ों, पुलों की सुध ले, उद्यमियों को आधे दाम पर बिजली दे, ठेकेदारी प्रथा को बंद किया जाए और मॉडल अस्पताल काठा का उपचार कर यहां डॉक्टरों की तैनाती की जाए।
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