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प्रदेश को 2025 तक हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लिये ठोस प्रयास की आवश्यकता- राम सुभग सिंह

PRIYANKA THAKUR | 7 जनवरी 2023 at 10:32 am

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HNN / नाहन

हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2025 तक पूरी तरह से हरित ऊर्जा राज्य बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिये ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है। इसके लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ सौर ऊर्जा की ओर बढ़ना होगा। यह बात विशेष मुख्य सचिव बहुद्देशीय परियोजनाएं एवं ऊर्जा राम सुभग सिंह ने उपायुक्त कार्यालय सभागार में प्रदेश में पन विद्युत परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि हरित ऊर्जा राज्य की परिकल्पना को साकार करने वाला हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बनेगा। राम सुभग सिंह ने कहा कि अक्षय ऊर्जा समय की मांग है और इसके दोहन के लिये हर संभव प्रयास किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि थर्मल ऊर्जा के उपयोग को पूरी तरह से हतोत्साहित किया जाए। सौर ऊर्जा की अवधारणा को अपनाने के लिये लोगों को तैयार करने के लिये सार्थक प्रयास किये जाने चाहिए।

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उन्होंने कहा कि ट्रांसमिशन लाइन की गुणवत्ता तथा ट्रांसमिशन क्षति को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने ऊर्जा ऑडिट की आवश्यकता पर भी बल दिया। निदेशक ऊर्जा हरीकेश मीणा ने इस अवसर पर राज्य की जल विद्युत परियोजनाओं पर एक विस्तृत पावर प्वांइट प्रेजेंटेशन दी। उन्होंने कहा कि राज्य में 11145 मैगावाट की 171 जल विद्युत परियोजनाएं विद्यमान है और यह देश की जल विद्युत ऊर्जा का 23 प्रतिशत है और 53 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।

पांच मैगावाट तक की 95 परियोजनाएं कार्य कर रही हैं। उन्होंने अवगत करवाया कि वर्ष 2023-24 के दौरान 1000 मैगावाट की परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी। इसमें 800 मैगावाट की पार्वती जल विद्युत परियोजना, 150 मैगावाट की टिडोंग, 25 मैगावाट की लुंबाडिग तथा 24 मैगावाट की सिटीमरंग परियोजनाएं शामिल हैं। वर्ष 2025 तक 2425 मैगावाट की परियोजनाओं को जबकि 2027 के बाद 5200 मैगावाट की परियोजनाओं को पूरा कर दिया जाएगा।

मीणा ने अवगत करवाया कि सरकार ने पंप स्टोरेज प्रस्ताव आमंत्रित किये हैं और सार्वजनिक क्षेत्र सीमित में अभी तक कुल 8500 मैगावाट के प्रस्ताव प्राप्त हुए है। इनमें एसजेवीएनएल सेे 2570 मैगावाट, एनटीपीसी से 2400 मैगावाट, बीबीएमबी से 1800 मैगावाट तथा एचपीसीएल से 1730 मैगावाट के प्रस्ताव शामिल हैं। निजी क्षेत्र से लभग 2000 मैगावाट के प्रस्ताव प्राप्त हुए है और ये प्रस्ताव प्रक्रियाधीन हैं। प्रस्तुति में जानकारी दी गई कि दिसम्बर 2022 तक राज्य का विद्युत राजस्व 1302 करोड़ रुपये रहा जिसे 2027 तक 13687 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

अगले पांच सालों में 500 मैगावाट सौर ऊर्जा का भी लक्ष्य रखा गया है। रेणुका बांध परियोजना पर प्रस्तुति देते हुए महाप्रबंधक इंजीनियर एम.के. कपूर ने अवगत करवाया कि यमुना नदी की सहायक नदी गिरी पर इस राष्ट्रीय परियोजना के निर्माण की प्रक्रिया जोरो पर है। वर्ष 2018 में परियोजना का प्राक्कलन 6947 करोड़ रुपये का है जिसमें पानी की आपूर्ति पर 6647.46 करोड़ जबकि बिजली पर 299 करोड़ रुपये की लागत शामिल है। परियोजना परिव्यय का 90 प्रतिशत केन्द्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

148 मीटर ऊंचा बांध बनेगा। 1508 हेक्टेयर क्षेत्र जलमग्न होगा। 24 किलोमीटर लंबी सुंरग का निर्माण किया जाएगा और 2023 में पानी डाईवर्जन का कार्य आरंभ किया जाएगा। गौरतलब है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री द्वारा 2021 में किया गया है। बैठक में अवगत करवाया गया कि परियोजना के लिये भूमि अधीग्रहण का कार्य कर लिया है। कुल 2800 करोड़ भूमि अधिग्रहण के एवज में देय है जिसमें से 1000 करोड़ रुपये प्रभावित परिवारों को वितरित किये जा चुके हैं।

630 करोड़ की राशि वन विभाग को दी जानी है। परियोजना से क्षेत्र की 20 पंचायतो के 41 गांव तथा 7000 की आबादी प्रभावित होगी जबकि 346 परिवार बेघर हो रहे हैं। बैठक में 450 मैगावाट की शौंगटोंग कड़छम तथा काशंग परियोजनाओ की प्रगति पर भी प्रस्तुति दी गई। शौंगटोंग कड़छम परियोजना के निर्माण पर 1700 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं तथा 44 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है। परियोजना जुलाई 2026 तक पूरी होगी।

इसी प्रकार 130 मैगावाट की काशंग चरण दो व तीन परियोजना का प्राक्कलन 365 करोड़ रुपये का है और अभी तक 349 करोड़ खर्च हो चुके है। यह परियोजना भी जून 2026 तक बनकर तैयार हो जाएगी। इससे पूर्व, उपायुक्त आर.के.गौतम ने विशेष मुख्य सचिव का स्वागत किया तथा रेणुका बांध परियोजना के प्रभावित परिवारों के पुनर्वास व मुआवजे के संबंध में जानकारी सांझा की।

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