प्रदेश में भाजपा को विधायकों की खरीद-फरोख्त करना संसदीय चुनाव के लिए पड़ेगा भारी

By SAPNA THAKUR November 19, 2022 1 min read

HNN/ नाहन

गोवा, मणिपुर आदि राज्यों में हुए चुनाव के दौरान बहुमत ना मिलने के बावजूद भाजपा सरकार बनाने में कामयाब हुई है। धन, बल, जोड़-जुगत वाली भाजपा की इस राजनीति को लेकर जनमत अब पार्टी पर सवालिया निशान लगाने लग पड़ा है। आम जनता जहां पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे को एक आदर्श मानती थी वहीं अब जनता का रुख कुछ बदला-बदला सा भी नजर आने लग पड़ा है।

लोगों का कहना यह है कि जब जनतंत्र जनमत के साथ किसी दूसरी पार्टी को बहुमत देता है तो उसका सम्मान किया जाना बहुत जरूरी है। हिमाचल प्रदेश में चुनाव के बाद अब दोनों प्रमुख दल सत्ता को लेकर 8 दिसंबर का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी भाजपा के सामने प्रदेश में मिशन रिपीट करना बड़ी चुनौती है। जाहिर सी बात है मिशन रिपीट करने को लेकर भाजपा राजनीति के तमाम दावों को खेलने से कोई गुरेज नहीं करेगी।

वही यदि कांग्रेस 40 सीटें लेने में कामयाब हो जाती है तो भाजपा का मिशन रिपीट जोड़ जुगत में भी धराशाई हो सकता है। अब यदि आंकड़ा आजाद उम्मीदवारों का या अन्य दलों का ज्यादा होता है साथ ही कांग्रेस 30 से 35 सीट तक समीटती है उस स्थिति में भाजपा किसी भी सूरत में सत्ता के अवसर को हाथ से नहीं जाने देगी।

ऐसे में आजाद अथवा अन्य दल से जीते हुए उम्मीदवारों की लॉटरी निकलेगी। वही कांग्रेस को भी रिजल्ट के तुरंत बाद अपने विधायकों को लक्ष्मण रेखा के अंदर समेट कर रखना होगा। बावजूद इसके, बहुमत ना होने की स्थिति में कांग्रेस अथवा अन्य दलों में जोड़-तोड़ करने में यदि भाजपा कामयाब हो जाती है तो निश्चित रूप से भले ही सरकार बना ले मगर आगामी संसदीय चुनाव में भाजपा को ना केवल प्रदेश में बल्कि देश में भी झटके लगना तय होंगे।

फिलहाल देश में अभी भी पीएम नरेंद्र मोदी एक ब्रांड चेहरा है मगर जोड़ जुगत और जन तंत्र पर जनमत पर किए जाने वाला कुठार घात ब्रांड चेहरे को भी हाशिए पर धकेल सकता है।