प्रधानमन्त्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत देश भर से अब तक 70,770 शिकायतें प्राप्त
Himachalnow / Delhi
ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर ‘मेरी सड़क एप’ पर बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज
मेरी सड़क ऐप पर दर्ज शिकायतें
केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्य मन्त्री कमलेश पासवान ने संसद में राज्यसभा सांसद सुश्री इंदु बाला गोस्वामी को जानकारी दी कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में बनाई गई सड़कों की गुणवत्ता, रख-रखाव आदि को लेकर “मेरी सड़क एप्लीकेशन” पर 18 मार्च 2025 तक देश भर से कुल 70,770 शिकायतें / सुझाव प्राप्त हुए हैं। इनमें से 63,844 शिकायतों का अंतिम जवाब दिया जा चुका है, जबकि 6,871 शिकायतों / सुझावों पर अंतरिम उत्तर प्रदान किया गया है।
सीपीग्राम पोर्टल पर प्राप्त जनशिकायतें
उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की गुणवत्ता व रख-रखाव से संबंधित सीपीग्राम पोर्टल पर 22,895 जन शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 22,735 का समाधान किया जा चुका है। बाकी शिकायतों को संबंधित राज्य सरकारों को उचित कार्यवाही हेतु भेजा गया है।
घटिया गुणवत्ता वाली सड़कों की शिकायतों पर कार्यवाही
कम गुणवत्ता या खराब सड़कों की शिकायतें संबंधित राज्य सरकारों के स्टेट क्वालिटी कोऑर्डिनेशन को भेजी जाती हैं। यदि उनसे उपयुक्त प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एजेंसी (NRIDA) द्वारा राष्ट्रीय गुणवत्ता मॉनिटर (National Quality Monitor) को प्रतिनियुक्त किया जाता है। आगे की कार्रवाई उनकी रिपोर्ट के आधार पर की जाती है।
सड़क रखरखाव की जिम्मेदारी निर्माण कंपनी की
पासवान ने बताया कि योजना की गाइडलाइन्स के अनुसार, सभी स्वीकृत सड़क परियोजनाओं के मरम्मत और रखरखाव को पांच वर्षों तक सड़क निर्माण के ठेके में शामिल किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्माण कंपनी ही अगले पांच वर्षों तक सड़क के रखरखाव के लिए उत्तरदायी रहे।
ई-मार्ग एप के ज़रिए निगरानी
उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत सड़कों की निगरानी के लिए सभी राज्यों में “ई-मार्ग” नामक ऑनलाइन एप्लिकेशन को लागू किया गया है, जो सड़क निर्माण के बाद की पांच वर्षों की अवधि तक निगरानी करता है।
पीएमजीएसवाई की शुरुआत और विस्तार
भारत सरकार ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को गरीबी उन्मूलन रणनीति के तहत सभी ग्रामीण क्षेत्रों को साल भर सड़क सुविधा से जोड़ने के उद्देश्य से 25 दिसंबर 2000 को शुरू किया था। इसके दूसरे और तीसरे चरण में ग्रामीण सड़कों को अपग्रेड कर स्कूलों, अस्पतालों, ग्रामीण कृषि मंडियों आदि से जोड़ा जा रहा है।