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भू जल के अवैध दोहन पर तुरंत अंकुश लगाए सरकार – डाॅ. तंवर

SAPNA THAKUR | 17 जून 2022 at 3:21 pm

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HNN/ शिमला

भू जल के अवैध किए जा रहे दोहन पर सरकार को अंकुश लगाना चाहिए ताकि भविष्य के लिए जल का सरंक्षण व पानी की गंभीर समस्या का समाधान भी संभव हो सके। इस गंभीर समस्या बारे हिमाचल प्रदेश किसान सभा अध्यक्ष डाॅ. कुलदीप तंवर की अध्यक्षता में एक प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री हि.प्र के लिए जिलाधीश शिमला के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। डाॅ. तंवर ने मीडिया को जारी बयान में कहा कि राजस्व के वजीब-उल-अर्ज में दर्ज स्थानीय लोगों के अधिकारों की परवाह किए बिना और स्थानीय पंचायत और दावेदारों की अनुमति के बिना प्रभावशाली लोग मनमाने ढंग से भू जल की निकासी बड़े पैमानी पर कर रहे हैं।

इनमें होटल व्यवसायी, निजी संस्थान या ग्रामीण इलाकों में जमीन खरीदने वाले लोग शामिल हैं। इसके अतिरिक्त स्थानीय पंचायतों में भी पानी के टैंकर माफिया काफी सक्रिय हैं, जो बिना परमिट के भी स्थानीय स्रोतों से पानी बेच रहे हैं। हिमाचल किसान सभा ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि भू जल निकासी पर बने कानूनों और नियमों को पूरे राज्य में और अधिक सख्ती से लागू किया जाए। हिमाचल किसान सभा ने राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है कि उसने हिमाचल प्रदेश भू जल (विकास और प्रबंधन का विनियमन और नियंत्रण) अधिनियम, 2005 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है ताकि केंद्रीय भू जल अधिनियम दिनांक 24-09-2020 के दिशा निर्देशों के साथ तालमेल बिठाया जा सके।

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उन्होने कहा कि पहाड़ों में मैदानों की तरह भूमिगत जल नहीं है, लेकिन पहाड़ के अंदर से पानी बह रहा है, जिसे खोदने से रोके जाने पर उसके नीचे के सभी स्रोत सूख सकते हैं। उन्होने कहा कि कानून में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी निजी व्यक्ति, संस्था, वाणिज्यिक संगठन या समाज बिना ग्राम सभा और हकदारी के बोरवेल ट्यूबवेल हैंडपंप के माध्यम से भूजल का दोहन नहीं कर सकता है, भले ही वह उसके निजी परिसर से ही क्यों न ऐसा कर रहा हो। अवैध रूप से खोदे गए बोरवेलों को तत्काल रोका जाए और दोषियों पर जुर्माना लगाया जाए। यहां तक कि जिन होटलों या संस्थानों में सीवरेज प्लांट लगाए गए हैं, वे भी सिर्फ दिखावे के लिए हैं, वे भी बारिश का फायदा उठा रहे हैं और सीवेज को खुले में बहा रहे हैं, इससे कई जल स्रोत दूषित हो रहे हैं।

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