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सुप्रीम कोर्ट की हिमाचल हाईकोर्ट को नसीहत, चुनी सरकार को काम करने दें

Shailesh Saini 14 Feb 2026 Edited 14 Feb 1 min read

स्थानीय निकाय चुनाव 31 मई 2026 तक कराने की मोहलत, बार-बार हस्तक्षेप पर नाराजगी

दिल्ली/शिमला :

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि चुनी हुई सरकार को काम करने दिया जाए और उसके फैसलों में बार-बार दखल उचित नहीं है। सर्वोच्च अदालत ने चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह के हस्तक्षेप को गंभीरता से लिया जाएगा।

मामला हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को राहत देते हुए चुनाव कराने की समय सीमा 31 मई 2026 तक बढ़ा दी। इससे पहले प्रारंभिक कार्यों के लिए 28 फरवरी की समयसीमा तय थी, जिसे अब बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दिया गया है।

अदालत ने निर्देश दिया कि सीमांकन और आरक्षण सहित सभी औपचारिकताएं 31 मार्च तक पूरी की जाएं और उसके बाद आठ सप्ताह के भीतर चुनाव संपन्न कराए जाएं।


पीठ में न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि हाईकोर्ट चुनी हुई सरकार को काम नहीं करने दे रहा है। हालांकि, अदालत ने यह भी दोहराया कि हाई कोर्ट नागरिकों के अधिकारों के संरक्षक हैं, लेकिन उन्हें कार्यपालिका के कार्य में अनावश्यक बाधा नहीं डालनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस फैसले का समर्थन किया जिसमें सीमांकन लंबित होने के आधार पर चुनाव टालने की राज्य सरकार की मांग खारिज की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि सीमांकन लंबित होना चुनाव स्थगित करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। साथ ही यह भी माना कि कार्यकाल समाप्ति के बाद समय पर चुनाव कराना संवैधानिक दायित्व है।


प्रदेश में करीब 3,500 ग्राम पंचायतें, 90 पंचायत समितियां, 11 जिला परिषद और 71 शहरी निकायों में इस वर्ष चुनाव प्रस्तावित हैं। अदालत ने साफ किया कि तय समयसीमा के बाद किसी भी प्रकार के और विस्तार के आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।