मानसून के बीच सिरमौर में गहरा सकता है पेयजल संकट

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अब तक 18 फीसदी भी रिचार्ज नहीं हो पाए पानी के स्रोत

HNN/ नाहन

मानसून की अगर यही स्थिति रही तो सिरमौर पेजजल संकट सरकार और संबंधित विभाग के गले की फांस बन सकता है। प्रदेश में मानसून आए एक माह बीत चुका है, बावजूद इसके जिला सिरमौर का अधिकांश क्षेत्र बारिश से अछूता है, जहां बारिशें हो भी रही है, वह नाममात्र है। ऐसी स्थिति में सबसे बड़ा असर जिला के पांचों मंडलों की अधिकतर पेयजल योजनाओं पर पड़ रहा है।

बारिश न होने से अधिकतर पेयजल योजनाएं हांफने लगी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार अमूमन इस सीजन में अबतक 20 से 25 फीसदी तक पेयजल स्रोत रिचार्ज हो जाते थे, लेकिन मौजूदा हालात ऐसे बन गए हैं कि अब तक 18 फीसदी वाटर रिसोर्सिज भी रिजार्ज नहीं हो पाए है।  ये स्थिति बरकरार रही तो जिला में बड़ा पेयजल संकट खड़ा हो सकता है, जिसका असर न केवल सर्दियों बल्कि आने वाली गर्मियों में नजर आएगा।

विभाग इस समय इसी दुविधा में है कि आगामी दिनों में यदि पानी का संकट गहराता है तो उस स्थिति से कैसा निपटा जाए। भारी स्टाफ के टोटे के चलते जिला का जलशक्ति विभाग भी मौजूदा समय जुगाड़ से चल रहा है। ऐसे में कहा जा सकता है कि न केवल विभाग, बल्कि लोगों को भी पानी की समस्या से निपटने के लिए अभी से तैयार रहना होगा।

इन स्थानों पर विकराल हो सकता है पानी का संकट….

बारिश न होने के चलते जिला सिरमौर के राजगढ़, सराहां, जमटा, कौलांवालाभूड़, धारक्यारी, कालाअंब, विक्रमबाग, मात्तर भेड़ों, माजरा आदि क्षेत्रों में पानी का संकट और अधिक विकराल हो सकता है। यदि भूमिगत वाटर रिसोर्सिज समय रहते रिचार्ज नहीं हो पाए तो इसका असर हैंडपंपों पर भी पड़ेगा।

जिला में कई स्थानों पर हैंडपंप विकल्प के तौर पर भी लगाए गए हैं। इस बार मानसून के सीजन में बारिशें नाममात्र होने से हैंडपंप भी सूख सकते हैं। उधर, जलशक्ति विभाग के अधीक्षण अभियंता राजीव महाजन ने बताया कि बारिशें न होने से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन वाटर सोर्सिज अभी तक 18 फीसदी भी रिजार्ज नहीं हो पाए हैं।