राज्यसभा टिकट से कांग्रेस का बदला सियासी फार्मूला, हिमाचल में पहली बार संगठन पर बड़ा दांव
स्थानीय कार्यकर्ता अनुराग शर्मा को उम्मीदवार बनाकर दिया संदेश—संगठन मजबूत तो सत्ता मजबूत
हिमाचल नाऊ न्यूज़ नई दिल्ली/शिमला
राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी के बाद घोषित इस सूची में हिमाचल प्रदेश से कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनुराग शर्मा को उम्मीदवार बनाया गया है।
हिमाचल की राजनीति में इस फैसले को केवल एक टिकट घोषणा नहीं बल्कि कांग्रेस की बदली हुई राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
अब बड़ी बात यह है कि कांग्रेस ने अपनी परंपरागत रणनीति को बदलने की कोशिश की है।
इसी बदली5 हुई रणनीति के तहत इस बार किसी बड़े राष्ट्रीय चेहरे की बजाय एक सामान्य संगठनात्मक कार्यकर्ता को उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने कार्यकर्ताओं के मनोबल को नई उम्मीद देने की कोशिश की है। राजनीतिक हलकों में इसे संगठन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा संदेश माना जा रहा है।
दरअसल, लंबे समय तक हिमाचल से कांग्रेस ऐसे नेताओं को राज्यसभा भेजती रही है जो या तो राष्ट्रीय स्तर के बड़े चेहरे रहे या फिर सरकार और संगठन में पहले से ही शीर्ष पदों पर रहे।
लेकिन इस बार कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे अनुराग शर्मा को मौका देकर पार्टी ने यह संकेत दिया है कि संगठन में काम करने वाले नेताओं को भी अब सीधे संसद तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला कहीं न कहीं उस राजनीतिक रणनीति से भी प्रेरित है जिसमें संगठन के साधारण कार्यकर्ता को आगे बढ़ाकर कार्यकर्ताओं में ऊर्जा पैदा की जाती है।
भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से संगठन आधारित इसी मॉडल पर काम करती रही है और अब कांग्रेस भी उसी दिशा में प्रयोग करती दिखाई दे रही है।
हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए कांग्रेस का इतिहास भी काफी समृद्ध रहा है। राज्य के गठन के बाद से कांग्रेस ने कई ऐसे नेताओं को उच्च सदन भेजा जिन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शुरुआती दौर में सी.एल. वर्मा और लीला देवी जैसे नेताओं ने राज्यसभा में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया।
इसके बाद सत्यवती डांग और रोशन लाल जैसे नेताओं ने लंबे समय तक उच्च सदन में हिमाचल की आवाज बुलंद की। रोशन लाल लगातार तीन बार राज्यसभा सदस्य रहे और लगभग 18 वर्षों तक इस सदन में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया।
कांग्रेस की ओर से राज्यसभा में भेजे गए प्रमुख नेताओं में सुशील बरोंगपा, चंद्रेश कुमारी और विप्लव ठाकुर जैसे नाम भी शामिल रहे हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का प्रतिनिधित्व किया।
हिमाचल से कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली राज्यसभा नेताओं में आनंद शर्मा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। वह अलग-अलग समय पर तीन बार राज्यसभा पहुंचे और केंद्र सरकार में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया और कांग्रेस के प्रमुख राष्ट्रीय चेहरों में शामिल रहे।
हालांकि हाल के वर्षों में राज्यसभा चुनाव कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण भी साबित हुए। 2024 के चुनाव में पार्टी उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी को कड़े मुकाबले और क्रॉस वोटिंग के कारण हार का सामना करना पड़ा था, जिसने हिमाचल की राजनीति में बड़ा सियासी संदेश दिया था।
इसी अनुभव से सबक लेते हुए इस बार कांग्रेस ने स्थानीय और संगठनात्मक चेहरे को आगे कर नई रणनीति अपनाई है। पार्टी को उम्मीद है कि इस फैसले से संगठन में नई ऊर्जा आएगी और कार्यकर्ताओं को यह संदेश जाएगा कि मेहनत और संगठनात्मक काम के आधार पर भी बड़े राजनीतिक अवसर मिल सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हिमाचल में राज्यसभा की तीन सीटों के इतिहास को देखते हुए यह फैसला कांग्रेस की रणनीतिक दिशा में बड़ा बदलाव माना जा सकता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि अनुराग शर्मा की उम्मीदवारी से पार्टी संगठन को कितना फायदा मिलता है और यह प्रयोग भविष्य की राजनीति में कितना प्रभाव डालता है।