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राज्य स्तरीय वामन द्वादशी धार्मिक मेला बना राजनीति का अखाड़ा

Ankita | 29 सितंबर 2023 at 10:49 am

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प्रदेश की एकमात्र महिला विधायक बोली- व्हाट्सएप पर दिया निमंत्रण, बैठक में भी नहीं था बुलाया

HNN/ सराहां

जिला सिरमौर में पच्छाद के सराहां में आयोजित हुए राज्य स्तरीय वामन द्वादशी धार्मिक मेला अब राजनीतिक अखाड़ा बनकर रह गया है। हालांकि यह आरोप इस विधानसभा क्षेत्र की विधायक रीना कश्यप ने भी लगाए हैं। तो वहीं मेले का मंच कुछ लोगों के लिए एक राजनीतिक पहचान बनाने का जरिया बना है। हालांकि इस राज्य स्तरीय मेले का शुभारंभ डीसी सिरमौर के द्वारा किया गया। तो वहीं डीजीएम और ओएसडी को भी चीफ गेस्ट बनने का मौका मिला।

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प्रदेश की विधानसभा में एकमात्र महिला विधायक ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया में प्रशासनिक व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा किया है। बता दें कि शिमला संसदीय क्षेत्र के सांसद सुरेश कश्यप भी इसी विधानसभा क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं। बावजूद इसके सांसद और विधायक दोनों ने व्हाट्सएप पर निमंत्रण भेजने की बात कही। यही नहीं विधायक रीना कश्यप का कहना है कि मेला कमेटी की बैठक में भी उनको शामिल नहीं किया गया जबकि इस बैठक में विधायक को भी बुलाया जाना जरूरी होता है।

उन्होंने बताया कि धार्मिक मेले का मंच कुछ लोगों के लिए तो भविष्य में राजनीतिक पहचान बनाने के लिए भी प्रमुख रहा। हालांकि यह विधानसभा क्षेत्र रिजर्व है। बावजूद इसके यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि 2027 में यह विधानसभा संभवत ओपन भी हो सकती है। हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि राज्य स्तरीय मेले में जिला के पत्रकारों को भी कवरेज के लिए निमंत्रण नहीं दिया गया था। मेला कवरेज के लिए केवल स्थानीय पत्रकारों को ही निमंत्रण दिए गए थे।

याद दिला दें कि पहले दिन मेले की ओपनिंग में चीफ गेस्ट डीसी सिरमौर थे। तो संध्याकालीन सांस्कृतिक संध्या में चीफ गेस्ट प्रमुख व्यवसायी, समाज सेवक और भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे विनोज शर्मा थे। धार्मिक मेले के दूसरे दिन पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और सांस्कृतिक संध्या में विनोद सुल्तानपुरी विधायक को चीफ गेस्ट बनाया गया था। समापन समारोह के दिन हर्षवर्धन चौहान उद्योग मंत्री हिमाचल प्रदेश सरकार चीफ गेस्ट थे।

तो सायं को होने वाली सांस्कृतिक संध्या के लिए चीफ गेस्ट में जहां ओएसडी गोपाल शर्मा का नाम था वह किसी कारण से नहीं आ पाए तो उनकी जगह डीजीएम सतीश ठाकुर को बतौर चीफ गेस्ट बुलाया गया था। हालांकि यह राज्य स्तरीय मेला है बावजूद इसके इस तीन दिवसीय मेले में अव्यवस्थाओं ने भी प्रशासन की तैयारी की जमकर पोल खोली।

आरोप तो यहां तक है कि मेला के लिए इंडस्ट्री आदि जगहों से भी पैसा इकट्ठा किया गया था और उससे भी बड़ी बात जो सामने निकल कर आई है वहां यह भी पता चला है कि जो टेंडर पूरे प्लांट का एक ही व्यक्ति को दिया गया था उसने उसे टेंडर को आगे 2 लाख के फायदे में दे दिया था। इसका सबसे बड़ा ड्रॉबैक यह हुआ कि मेला में स्टॉल बड़े महंगे अलॉट हुई जिसके कारण स्टॉल लगाने वालों ने अपनी कीमतों में भी भारी उछाल ला दिया।

सवाल तो यह उठता है कि यह मेला जहां धार्मिक आस्था और परंपरा को जिंदा रखने के लिए आयोजित किया जाता है उसकी जगह यह मेला केवल कमाई का साधन बना हुआ नजर आया। इस मेले का मुख्य आकर्षण कुश्ती होता है। मगर आयोजन कमेटी की नाकामियों के चलते महिला पहलवानों ने अपनी उपस्थिति ही दर्ज नहीं करवाई। केवल हरियाणा से मां और बेटी ही कुश्ती में पहुंची।

पता तो यह भी चला कि प्रशासन ने मजबूरी में मां और बेटी की अन्य महिला पहलवानों के ना आने पर किरकिरी से बचने के लिए दोनों की कुश्ती करवाई। मेले में अव्यवस्थाओं की बात की जाए तो सबसे बड़ी समस्या पार्किंग और लोगों के लिए वैकल्पिक शौचायलयों की कमी बड़ी नजर आई। हालांकि कानून व्यवस्था बनाए जाने को लेकर के पुलिस और होमगार्ड के जवान बड़ी मुस्तादी और ईमानदारी के साथ ड्यूटी करते हुए नजर आए।

मगर प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्था की बात की जाए तो राज्य स्तरीय मेला एक जिला स्तरीय मेले से भी गया गुजरा नजर आया। प्रशासन के द्वारा सांसद और विधायक को ना बुलाया जाना और जब विधायक ने इस मामले को लेकर एक पत्रकार वार्ता आयोजित करी तो उसके बाद व्हाट्सएप पर और घर पर निमंत्रण कार्ड भेजा गया।

लोगों का तो यह भी आरोप है कि जहां इस धार्मिक मेले को पुरानी मान्यताओं के अनुसार जनता के लिए और अधिक सुविधाजनक बनाया जाना चाहिए था। वहीं यह मेला केवल राजनीतिक रोटियां सेंकने और वीआईपी मोमेंट को खुश करने में ही ज्यादा नजर आया। उधर, विधायक रीना कश्यप ने बताया कि उन्हें व्हाट्सएप पर ही निमंत्रण दिया गया था जबकि फोन पर कॉल कर भी निमंत्रण दिया जा सकता था।

एसडीम संजीव धीमान का कहना है कि उन्होंने विधायक के घर पर स्पेशल व्यक्ति भेज कर निमंत्रण दिया था। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय मेला में जिला स्तरीय पत्रकारों को बुलाने के लिए डीपीआरओ की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि मेले को अधिक से अधिक सुविधाजनक बनाए जाने के पूरे प्रयास किए गए।

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