लेटेस्ट हिमाचल प्रदेश न्यूज़ हेडलाइंस

रायपुररानी की रैली में साबित हुआ नायब सिंह सैनी का कद

PARUL | 25 अप्रैल 2024 at 12:06 pm

Share On WhatsApp Share On Facebook Share On Twitter

बैकवर्ड क्लास अब भाजपा के लिए होगा निर्णायक, कुरुक्षेत्र रैली के लिए भी भारी उत्साह

भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने हरियाणा लोकसभा के लिए बैकवर्ड क्लास को दिया हुआ अधिमान असरदार साबित होने लग पड़ा है। नायब सिंह सैनी को दिए गए मुख्यमंत्री के दायित्व के बाद हरियाणा में कांग्रेस सहित अन्य दलों के दांत कट-कटाना शुरू हो गए हैं। यहां बताना जरूरी है कि हाल ही में 21 अप्रैल को हरियाणा के रायपुर रानी में निकाली गई नायब सिंह की रैली कई मायनो में असरदार साबित हुई है।

अब यदि बात की जाए हरियाणा में सैनी समाज, तरखान, लोहार, पिंजे, वर्मा यानी सोने का काम करने वाली जाति, प्रजापति, लबाना, मैहरे, नाई आदि जातियां अरसे से अपेक्षित थी। यही नहीं बीजेपी ने न केवल 2024 की लोकसभा बल्कि 2026 के परिसीमन के लिए भी बड़ा निशाना साधा है। जानना जरूरी है कि मौजूदा समय हरियाणा में 10 लोकसभा और 90 विधानसभा सीट है। जिसमें 17 विधानसभा सीटें अनुसूचित जाति के लिए तथा दो सीटें लोकसभा के लिए रिजर्व है।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें: Join WhatsApp Group

2026 परिसीमन के लिए 14 लोकसभा और 126 विधानसभा सेट प्रस्तावित है। यानी एक सीट रिजर्व कैटेगरी में लोकसभा की बढ़ जाएगी तथा 8 सीट में विधानसभा की रिजर्व कैटेगरी में बढ़ेगी। सैनी समाज ज्यादातर भाजपा के साथ ही रहा। यही वजह है कि नायब सिंह सैनी के माध्यम से भाजपा अपने भविष्य को भी अनुसूचित जाति, जनजाति बैकवर्ड क्लास को अधिमान देकर सुरक्षित बन चुकी है।

असल में रायपुररानी की रैली में करीब 6000 के आसपास बैठने के लिए कुर्सियां लगाई गई थी। हर कुर्सी लोकसभा जीत की पुष्टि कर रही थी तो करीब 1000 की संख्या के लगभग लोग चारों तरफ खड़े हुए भी थे। इस रैली में स्थानीय व्यावसायिक सामाजिक कार्यकर्ता सतीश कुमार सैनी और उनके समर्थकों का एक बड़ा प्रभाव भी नजर आया। बता दें कि सतीश सैनी क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में शुमार करते हैं।

यही नहीं पंचायती राज के समस्त चुनावों में सतीश सैनी निर्णायक साबित रहते हैं। रायपुर रानी की कुल जनसंख्या 9028 के आसपास बताई गई है। ऐसे में 6000 से अधिक की संख्या रैली में नजर आना भाजपा के लिए एक बड़ा शुभ संकेत है। अब यदि बात की जाए कुरुक्षेत्र की तो यहां हरियाणा विकास पार्टी कांग्रेस पार्टी, इंडियन नेशनल लोकदल लोक दल जनता दल तथा भाजपा प्रमुख राजनीतिक दल है।

पूर्व गृहमंत्री स्व. गुलजारी लाल नंदा ने गुजरात से यहां आकर इसे अपनी कर्म भूमि बनाया था। कुरुक्षेत्र पार्लियामेंट्री सीट पर सैनी बिरादरी से ताल्लुक रखने वाली कैलाशो को छोड़कर यहां पर बाहर से नेता ही अलग-अलग पार्टियों से विजय रहे है। इस सीट पर करीब 18 लाख मतदाता है हालांकि जाति के आधार पर यहां पर जाटों की संख्या अधिक है बावजूद इसके सैनी बिरादरी का नाम मुख्यमंत्री पद से जुड़ने के बाद हवा का पूरा का पूरा रुख भाजपा के पक्ष में जा चुका है।

जाट मतदाता करीब 14 से 13 परसेंट है जबकि अन्य समुदायों को जोड़ा जाए तो उनमें सबसे ज्यादा संख्या यानी मतदाता 8 फ़ीसदी है और अन्य को जोड़ दिया जाए तो बैकवर्ड क्लास की संख्या 20 फीसदी से ऊपर जाती है। यानी भाजपा शीर्ष नेतृत्व में एक बड़ी सोची समझी रणनीति के तहत इस बार तुरुप का इक्का 2024 के महा रण में फेंक दिया है।

कुल मिलाकर कहा जाए तो अंबाला का निम्न तबका जहां अनिल विज से काफी नाराज चल रहा था तो कर्मचारी वर्ग भी न केवल पूर्व मुख्यमंत्री बल्कि विज से भी काफी खफा था। भाजपा शीर्ष नेतृत्व वक्त पर इस बड़े डैमेज पर कंट्रोल भी किया है।

अब यदि नायब सिंह सैनी दोहरे दायित्व के साथ उपेक्षित रहे उत्तरी हरियाणा में विकास का मसौदा अपने श्वेत पत्र में रखते हैं तो निश्चित ही हरियाणा की 10 लोकसभा सीटों में से आठ लोकसभा सीट बीजेपी की झोली में जाने का अनुमान लगाया जा रहा है।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें

ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए अभी हमारे WhatsApp ग्रुप का हिस्सा बनें!

Join WhatsApp Group

आपकी राय, हमारी शक्ति!
इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया साझा करें


[web_stories title="false" view="grid", circle_size="20", number_of_stories= "7"]