HNN/ लाहौल
हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों के लोगों की इन दिनों मुसीबतें लगातार बढ़ती ही जा रही है। लगातार गिरता तापमान ना केवल लोगों बल्कि जीव जंतुओं के लिए भी परेशानी बढ़ा रहा है। आलम यह है कि लगातार गिरते तापमान के कारण पेयजल पाइप, झील और झरने जमने लग पड़े हैं जिससे पानी का संकट खड़ा हो गया है।
एक तरफ जहां बर्फ से ढके ऊंचे-ऊंचे पहाड़ और झील झरनों के जमा पानी का ऐसा दिलकश नजारा देखकर पर्यटकों की खुशी का ठिकाना नहीं रहता है तो वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों के लिए यह मुसीबतों के अंबार से कम नहीं है। अक्सर सर्दी का मौसम शुरू होने के साथ ही पहाड़ों पर पेयजल स्तोत्र जाम होने लगते हैं।
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इस बार नवंबर माह में ही झरने, झीलों का पानी जम गया है। मनाली-लेह मार्ग पर स्थित दीपकताल झील माइनस तापमान में जम गई है। ऐसे में इस झील का दीदार अब अप्रैल के बाद ही पर्यटक कर पाएंगे। उधर, घाटी की चंद्रताल, सूरजताल, नीलकंठ समेत दूसरी झीलों का पानी भी जम चुका है। रिहायशी इलाकों में लोगों को पीने के पानी के लिए कड़ी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
इसका मुख्य कारण यह है कि नल पूरी तरह से जम चुके हैं जिससे लोगों के घर में जल नहीं आ रहा है। इतना ही नहीं पानी के स्रोत जमने से न केवल इंसानों को बल्कि जीव-जंतुओं को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जीव जंतुओं को पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है जिसके चलते वह रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं।
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