राजधानी शिमला में निजी मिनी बस चालक-परिचालक संघ ने 40 किलोमीटर से अधिक दूरी की बसों को शहर में प्रवेश की अनुमति के विरोध में बसें न चलाने का फैसला लिया है। सोमवार से शहर की निजी बसें पूरी तरह ठप रहेंगी।
शिमला
लंबी दूरी की बसों से बढ़ा जाम, चालक-परिचालक संघ का विरोध
निजी बस चालक-परिचालक संघ का कहना है कि एचआरटीसी समेत निजी ऑपरेटरों की 40 किलोमीटर से अधिक दूरी की बसें शहर में प्रवेश करती हैं, जिससे लगातार जाम की समस्या बढ़ रही है। इन बसों की वजह से स्थानीय रूट प्रभावित हो रहे हैं और यात्रियों को घंटों ट्रैफिक में फंसा रहना पड़ता है।
आईएसबीटी तक सीमित करने की मांग
संघ की मांग है कि लंबी दूरी की बसों को सीधे आईएसबीटी तक सीमित किया जाए ताकि शहर के भीतर ट्रैफिक का दबाव कम हो। संघ का कहना है कि इस व्यवस्था से स्थानीय बस सेवाएं सुचारू रूप से चल सकेंगी और जनता को राहत मिलेगी।
पहले भी हो चुकी थी वार्ता
इससे पहले 13 अक्तूबर को संघ ने हड़ताल का ऐलान किया था, लेकिन परिवहन निदेशालय में हुई बैठक में 40 किलोमीटर से अधिक दूरी की बसों के प्रवेश पर रोक लगाने पर सहमति बनी थी। एचआरटीसी ने भी इस पर हामी भरी थी, जिसके बाद हड़ताल स्थगित कर दी गई थी। हालांकि अब तक आदेश लागू नहीं होने पर संघ ने दोबारा हड़ताल का रास्ता चुना है।
3 नवंबर से बसें खड़ी रहेंगी आरटीओ कार्यालय के बाहर
संघ ने घोषणा की है कि 3 नवंबर से सभी निजी बसें आरटीओ कार्यालय के बाहर खड़ी रहेंगी और हड़ताल जारी रहेगी। इस संबंध में शुक्रवार को शिमला सिटी प्राइवेट बस ऑपरेटर यूनियन के महासचिव ने आरटीओ शिमला को ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें लंबी दूरी की बसों के प्रवेश पर रोक और स्कूल बसों में सवारियों को अनुमति देने की मांग की गई।

