नौतोड़ मुद्दे पर असफलता छिपाने के लिए राज्यपाल को बना रहे निशाना: सूरत नेगी
जनजातीय हितों की रक्षा में विफल मंत्री जगत सिंह नेगी, बयानबाजी से बचें
हिमाचल नाऊ न्यूज शिमला
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता सूरत नेगी ने जनजातीय मंत्री जगत सिंह नेगी द्वारा राज्यपाल के खिलाफ दिए गए बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसे संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करार दिया है।
उन्होंने कहा कि मंत्री नेगी का यह रवैया न केवल एक संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है, बल्कि यह उनकी राजनीतिक हताशा और प्रशासनिक विफलता को भी उजागर करता है।सूरत नेगी ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों से जुड़े नौतोड़ जैसे संवेदनशील मुद्दे पर मंत्री जगत सिंह नेगी लगातार भ्रामक बयान दे रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी सरकार की नाकामियों को छिपाने के लिए अब राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद को निशाना बनाया जा रहा है।भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि नौतोड़ का मुद्दा नया नहीं है, बल्कि पिछले 20-25 वर्षों से यह चर्चा में है। वर्ष 2006 में कांग्रेस सरकार के समय ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया था कि नौतोड़ की जमीन केवल भूमिहीन लोगों को ही दी जाएगी।
1975 के अधिनियम में “लैंडलेस” की स्पष्ट परिभाषा दी गई थी और उसी आधार पर यह शर्त लागू की गई।उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 में कांग्रेस सरकार ने जनता को गुमराह किया।
उस समय Forest Conservation Act 1980 को आंशिक रूप से निलंबित करने की बात कही गई, लेकिन 2006 में लगाई गई “लैंडलेस” की शर्त को नहीं हटाया गया, जिसके कारण वास्तव में किसी को भी नौतोड़ का लाभ नहीं मिल सका।सूरत नेगी ने कहा कि वर्ष 2017 में जब जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी, तब इस पूरे मामले का अध्ययन किया गया और 2006 में लगाई गई शर्त को हटाने का रास्ता तलाशा गया, ताकि जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को वास्तविक लाभ मिल सके।
हालांकि उस समय फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण तत्काल निर्णय संभव नहीं था।उन्होंने कहा कि संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत राज्यपाल को कुछ विशेष अधिकार जरूर प्राप्त हैं, लेकिन किसी केंद्रीय कानून को निलंबित करना उतना सरल नहीं है जितना मंत्री नेगी जनता को बताने की कोशिश कर रहे हैं।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि जनजातीय मंत्री होने के बावजूद जगत सिंह नेगी अपने क्षेत्र और पूरे जनजातीय समाज के हितों की रक्षा करने में असफल साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के समय ट्राइबल सब प्लान के तहत लगभग 400 करोड़ रुपये का बजट जनजातीय विधानसभा क्षेत्रों के लिए रखा गया था, जिसे वर्तमान सरकार ने घटाकर करीब 150 करोड़ रुपये कर दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि Forest Rights Act 2006 के तहत जनजातीय लोगों को भूमि अधिकार देने की प्रक्रिया भी वर्तमान सरकार के कार्यकाल में बेहद धीमी रही है और बड़ी संख्या में मामले लंबित पड़े हैं।
अंत में सूरत नेगी ने कहा कि मंत्री नेगी को अपने बयान और व्यवहार में संयम रखना चाहिए। किसी भी संवैधानिक पद, विशेषकर राज्यपाल के खिलाफ इस प्रकार के बयान लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि यदि मंत्री वास्तव में जनजातीय समाज के हितैषी हैं तो उन्हें बयानबाजी छोड़कर केंद्र सरकार और राज्यपाल से संवाद स्थापित कर नौतोड़, फॉरेस्ट राइट्स और वाइब्रेंट विलेज जैसे मुद्दों का समाधान निकालने की दिशा में काम करना चाहिए।