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शोधकर्ता अद्वितीय नवाचारों के साथ अपने बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा करें- एच.के.चौधरी

Ankita • 9 Aug 2023 • 1 Min Read

कृषि विश्वविद्यालय में आईपीआर पर कार्यशाला आयोजित

HNN/ कांगड़ा

चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो एच.के. चौधरी ने शोधार्थियों, विद्यार्थियों , वैज्ञानिकों और अन्य प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि शोधार्थियों और छात्रों को एकाग्रता के साथ कड़ी मेहनत कर कृषक समुदाय के लिए उपयोगी नए और अनूठे नवाचारों के साथ सामने आना चाहिए।

कुलपति ने बताया कि बौद्धिक संपदा में ऐसे विचार और नवाचार शामिल हैं जिनका व्यावसायिक महत्व और मूल्य है। उन्होंने पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकार संरक्षण अधिनियम के महत्व पर भी बात की, जो फसल की किस्मों आदि की रक्षा करने में मदद करता है। उन्होंने ज्ञान को प्रौद्योगिकी में बदलने और पेटेंट प्राप्त करने, प्रत्येक जिले के दो उत्पादों को लोकप्रिय बनाने, वोकल फॉर लोकल और भौगोलिक संकेतक (जीआई) प्राप्त करने की आवश्यकता पर बात की।

उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे किसानों को पीपीवी और एफआरए, आईपीआर, जीआई और पेटेंट के बारे में जागरूक करें। उन्होंने कई स्थानीय किस्मों को पंजीकृत करने और किसानों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने में मदद करने के लिए विश्वविद्यालय में आईपीआर सेल की सराहना की। उन्होंने छात्रों से कहा कि कुछ भी मुफ्त नहीं है और किसी को अपनी बौद्धिक संपदा की रक्षा के लिए प्रयास करना चाहिए।

मुख्य अतिथि ने विश्वविद्यालय के शोधार्थियों द्वारा तैयार ‘ अ स्टेटस पेपर आन जीआई‘ और ‘हिमाचल प्रदेश में पुष्प विविधता‘ शोध पुस्तिका को भी जारी किया। अपना विशेष व्याख्यान देते हुए सेवानिवृत्त निदेशक अनुसंधान निदेशक डा. एस.सी.शर्मा ने बौद्धिक संपदा प्रबंधन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसी की निजी संपत्ति के लिए वसीयत लिखने की तरह, वैज्ञानिकों को अपने वैज्ञानिक नवाचारों और अन्य बौद्धिक संपदा की रक्षा करनी चाहिए।