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सिरमौर प्राथमिक शिक्षक संघ के चुनाव संपन्न, जयप्रकाश अध्यक्ष और चतुर ठाकुर बने महासचिव

Shailesh Saini • 14 Sep 2025 • 1 Min Read

शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने विधायक सोलंकी से की मुलाकात; नई शिक्षा नीति पर जताई चिंता

हिमाचल नाऊ न्यूज़ नाहन

जिला सिरमौर प्राथमिक शिक्षक संघ के चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हो गए हैं। सर्वसम्मति से हुए इस चुनाव में जयप्रकाश को अध्यक्ष और चतुर सिंह को महासचिव चुना गया है।

नवगठित पदाधिकारियों ने शिक्षकों की समस्याओं को लेकर स्थानीय विधायक अजय सोलंकी से मुलाकात की, जिसमें शिक्षा नीति और सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या पर चर्चा की गई।

नवगठित कार्यकारिणी में जगत सिंह को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, सुधीर को महालेखाकार, धर्मेंद्र को कोषाध्यक्ष और वीना कंवर को महिला विंग की कमान सौंपी गई है। नवनिर्वाचित अध्यक्ष जयप्रकाश ने बताया कि जल्द ही पूरी कार्यकारिणी का भी गठन कर लिया जाएगा, जिसका उद्देश्य शिक्षकों की मांगों को प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुंचाना है।

नवनिर्वाचित जिला अध्यक्ष जयप्रकाश के नेतृत्व में प्राथमिक शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने सर्किट हाउस में स्थानीय विधायक अजय सोलंकी से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान विधायक ने नवगठित पीटीएफ को शुभकामनाएं दीं और शिक्षकों के मुद्दों को हल करने के लिए सरकार की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।

विधायक अजय सोलंकी ने शिक्षकों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा, “एक प्राथमिक शिक्षक हर छात्र की भाग्य रेखा को बनाता है। यह उनका प्रयास ही है जो हमारे देश के भविष्य की नींव रखता है और एक शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण करता है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारे शिक्षक समुदाय को वह सम्मान और सहयोग मिले जिसके वे हकदार हैं।

विधायक अजय सोलंकी ने कहा कि मैं इस नए संघ को शुभकामनाएं देता हूँ और भरोसा दिलाता हूँ कि आपकी हर जायज मांग पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी।”इस अवसर पर नवनिर्वाचित अध्यक्ष जयप्रकाश ने शिक्षकों की लंबित मांगों और समस्याओं से विधायक को अवगत कराया।

उन्होंने विशेष रूप से नई शिक्षा नीति में बच्चों के दाखिले की उम्र 6 साल करने पर चिंता जताई। जयप्रकाश ने कहा, “नई शिक्षा नीति के तहत सरकारी स्कूलों में बच्चों के दाखिले की उम्र 6 वर्ष कर दी गई है, जबकि निजी स्कूल 4 से 5 साल के बच्चों को भी एडमिशन दे रहे हैं।

इसका सीधा असर सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या पर पड़ रहा है, क्योंकि अभिभावक अपने बच्चों को कम उम्र में ही निजी स्कूलों में दाखिला दिला रहे हैं। हमारी मांग है कि इस उम्र सीमा पर पुनर्विचार किया जाए ताकि सरकारी स्कूलों में बच्चों के दाखिले को बढ़ावा मिल सके।