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सिरमौर में खिलाड़ी चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल, 65 किलो वर्ग में चुने छात्र को नहीं मिला कुश्ती मुकाबला

Shailesh Saini • 53 Mins Ago • 1 Min Read

शावगा स्कूल के 12वीं कक्षा के छात्र के पिता ने दर्ज कराई शिकायत, खेल शिक्षकों की भूमिका पर लगाए सवाल; मामले में संबंधित पक्ष का जवाब बाकी

हिमाचल नाऊ न्यूज़ | राजगढ़

जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिता में खिलाड़ी के चयन के बाद उसे मुकाबले में अवसर नहीं मिलने का मामला सामने आने से खेल चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला राजगढ़ विकासखंड के शावगा स्कूल से जुड़ा है, जहां 12वीं कक्षा के छात्र दीक्षित ठाकुर का 65 किलोग्राम भार वर्ग की कुश्ती प्रतियोगिता के लिए चयन हुआ था।

इसके बावजूद नारग में आयोजित जिला स्तरीय अंडर-19 प्रतियोगिता में वह कुश्ती मुकाबले में नजर नहीं आया।छात्र के पिता नरेश कुमार ने इस संबंध में नारग पहुंचकर संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य को लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत में उन्होंने पूरे मामले की जांच करवाने और चयन के बावजूद उनके बेटे को मुकाबले से दूर रखने के कारण स्पष्ट करने की मांग की है।

नरेश कुमार का आरोप है कि उनके बेटे का चयन 65 किलोग्राम भार वर्ग में हुआ था, लेकिन प्रतियोगिता के दौरान उसकी जगह 61 किलोग्राम भार वर्ग में चयनित एक अन्य खिलाड़ी को कुश्ती मुकाबले में उतारा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि चयन प्रक्रिया के दौरान खिलाड़ी का नाम और भार वर्ग निर्धारित किया गया था, तो प्रतियोगिता के समय उसमें बदलाव किस आधार पर किया गया।

शिकायत वापस लेने के बाद दूसरे खेल में मौका देने का आरोपमामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब छात्र के पिता ने आरोप लगाया कि शिकायत वापस लेने के बाद उनके बेटे को जूडो प्रतियोगिता में खेलने का अवसर देने की बात कही गई। पिता के अनुसार उन्होंने शिकायत वापस लेने से इनकार कर दिया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग पर कायम रहे।

नरेश कुमार ने शारीरिक शिक्षा से जुड़े शिक्षकों पर खिलाड़ियों के साथ भेदभाव किए जाने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिताओं में चयन खिलाड़ियों के प्रदर्शन और निर्धारित नियमों के आधार पर होता है, ऐसे में चयनित खिलाड़ी को वास्तविक मुकाबले का अवसर क्यों नहीं मिला, इसकी जांच आवश्यक है।

अब चयन से ज्यादा सवाल प्रक्रिया परमामले में मुख्य सवाल यह है कि 65 किलोग्राम भार वर्ग के लिए चयनित छात्र को जिला स्तरीय प्रतियोगिता में मुकाबले से बाहर रखने का निर्णय किस स्तर पर और किन कारणों से लिया गया। यदि भार वर्ग या खिलाड़ी में बदलाव किया गया था तो क्या इसके लिए कोई निर्धारित प्रक्रिया अपनाई गई थी, यह भी जांच का विषय बन गया है।

हालांकि, इस पूरे मामले में संबंधित स्कूल प्रबंधन, खेल प्रशिक्षकों और प्रतियोगिता आयोजन से जुड़े अधिकारियों का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। उनका पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि छात्र को मुकाबले में क्यों नहीं उतारा गया और भार वर्ग से जुड़े निर्णय के पीछे वास्तविक कारण क्या था।