सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने पलटा नाहन नगर परिषद का खेल, भाजपा के गढ़ में सत्ता की जंग हुई रोमांचक
दिग्गज भाजपा नेताओं के गृह क्षेत्र में बहुमत भी नहीं बचा पाया पार्टी का दबदबा, विधायक अजय सोलंकी के वोट से बराबरी पर पहुंचे समीकरण; दो भाजपा पार्षदों के कांग्रेस संपर्क में होने की चर्चा
हिमाचल नाऊ न्यूज़ शिमला/नाहन।
नाहन नगर परिषद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद की लड़ाई अब पूरी तरह खुल चुकी है। शहरी निकाय चुनाव में बढ़त हासिल करने के बाद नगर परिषद पर कब्जा बरकरार रखने का दावा कर रही भाजपा की राह सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने मुश्किल बना दी है।
स्थानीय विधायकों को नगर निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में मतदान का अधिकार मिलने के बाद नाहन की राजनीति में नए समीकरण उभर आए हैं।नगर परिषद के 13 वार्डों में भाजपा ने सात सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस के खाते में छह सीटें आई थीं।
चुनाव परिणामों के बाद भाजपा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनना लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन अब नाहन से कांग्रेस विधायक अजय सोलंकी को मतदान का अधिकार मिलने से पूरा गणित बदल गया है। विधायक के वोट के साथ कांग्रेस का आंकड़ा भी सात पर पहुंच गया है और दोनों दल बराबरी पर खड़े नजर आ रहे हैं।
इस घटनाक्रम ने नाहन नगर परिषद को प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल कर दिया है। लंबे समय से भाजपा के कब्जे वाली इस परिषद में अब सत्ता का फैसला केवल चुनावी नतीजों से नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति और समर्थन जुटाने की क्षमता से तय होता दिखाई दे रहा है।
नाहन के नतीजे भाजपा के लिए इसलिए भी चर्चा का विषय बने हुए हैं क्योंकि यह क्षेत्र पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। प्रदेश भाजपा के कई प्रभावशाली चेहरे नाहन से जुड़े हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, स्थानीय संगठन के प्रमुख पदाधिकारी और नगर परिषद की पूर्व अध्यक्ष तक इसी क्षेत्र से संबंध रखते हैं।
इसके बावजूद भाजपा 13 में से केवल सात सीटों तक ही सीमित रही। राजनीतिक हलकों में इसे अपेक्षा से कमजोर प्रदर्शन माना जा रहा है।दूसरी ओर कांग्रेस के पास स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ा चेहरा केवल विधायक अजय सोलंकी थे। इसके बावजूद कांग्रेस ने छह वार्डों में जीत दर्ज कर भाजपा को कड़ी टक्कर दी।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वही विधायक कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरे हैं और उनके वोट ने मुकाबले को पूरी तरह बराबरी पर ला खड़ा किया है।राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं कि भाजपा के दो नवनिर्वाचित पार्षद कांग्रेस नेताओं के संपर्क में हैं।
हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ऐसी चर्चाओं ने भाजपा की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यदि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव के दौरान किसी प्रकार की क्रॉस वोटिंग या समर्थन परिवर्तन होता है तो नाहन नगर परिषद की सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा अपने पारंपरिक गढ़ में परिषद पर कब्जा बरकरार रखने में असफल रहती है तो यह केवल स्थानीय निकाय की हार नहीं होगी, बल्कि क्षेत्र में पार्टी की संगठनात्मक पकड़ पर भी सवाल खड़े होंगे।
वहीं कांग्रेस यदि बराबरी के इस आंकड़े को सत्ता में बदलने में सफल रहती है तो इसे विधायक अजय सोलंकी की अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धियों में गिना जाएगा।फिलहाल नाहन नगर परिषद में संख्या बल बराबरी पर है, लेकिन राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने भाजपा के लिए आसान दिख रही बाजी को रोमांचक मुकाबले में बदल दिया है और अब पूरे जिले की नजर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव पर टिक गई है।