सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड्स को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड स्कीम को अवैध करार देते हुए उस पर रोक लगा दी। अदालत ने कहा है कि इलेक्टोरल बॉन्ड सूचना के अधिकार का उल्लंघन करता है। मतदाता को पार्टियों की फंडिंग के बारे में जानने का अधिकार है।
कोर्ट ने अपने फैसले में एसबीआई से बॉन्ड खरीदने वालों की लिस्ट को भी सार्वजनिक करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि सरकार के पास पैसा कहां से आता है और कहां जाता है। कोर्ट ने माना कि गुमनाम चुनावी बॉन्ड सूचना के अधिकार और अनुच्छेद 19(1)(ए) का उल्लंघन है।
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने मामले पर सर्वसम्मति से फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दलों को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए मिलने वाली फंडिंग किसी गलत भावना को जन्म दे सकती है।
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