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सुप्रीम कोर्ट सख्त: दिल्ली में इंटरनेट बंद नहीं कर सकते, बैरिकेड हटाने और लोगों की आवाजाही बहाल करने के निर्देश

Shailesh Saini • 53 Mins Ago • 1 Min Read

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर अदालत में उठे सवाल, सीजेपी के तीनों नेता रिहा; केंद्र ने कहा—इंटरनेट सेवाएं बहाल

हिमाचल नाऊ न्यूज नई दिल्ली

दिल्ली में प्रदर्शन को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी, मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और लोगों को हिरासत में लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाया। अदालत ने दिल्ली में लगाए गए बैरिकेड हटाने, लोगों की आवाजाही सामान्य करने और इंटरनेट सेवाएं बहाल करने के निर्देश दिए।

केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गई हैं और मेट्रो परिचालन भी सामान्य हो चुका है।सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि दिल्ली में लोगों की स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

अदालत ने यह भी कहा कि वकीलों को उनके पेशेवर कर्तव्यों के निर्वहन से नहीं रोका जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और निर्धारित प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर भी पाबंदियां लगाए जाने का मुद्दा उठाया। अदालत के समक्ष शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई याचिकाएं रखी गईं।

इंटरनेट बंद करने और मेट्रो सेवाओं पर पाबंदी का मामला

सीजेपी के प्रदर्शन के मद्देनजर 10 अक्टूबर को दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद की गई थीं। केंद्र सरकार की मंजूरी से जनपथ-कर्तव्य पथ क्षेत्र के चार किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट निलंबन का आदेश जारी हुआ था।

इसके अतिरिक्त कई अस्थायी हिरासत केंद्रों के आसपास भी मोबाइल इंटरनेट पर रोक लगाई गई थी।मेट्रो के 45 स्टेशनों को भी सुरक्षा कारणों से बंद किया गया था। इससे आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर को ही स्पष्ट किया था कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर मेट्रो और दिल्ली आने वाली ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती। सेवाओं को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर चार याचिकाएं

10 अक्टूबर को हुए घटनाक्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कम से कम चार याचिकाएं सामने आईं। इनमें राजनीतिक नेताओं, वकीलों और अन्य लोगों को हिरासत में लेने, अधिवक्ताओं और मीडियाकर्मियों के साथ कथित मारपीट तथा मेट्रो सेवाओं पर प्रतिबंध जैसे मुद्दे उठाए गए।

एक याचिका में अदालत के 9 अक्टूबर के आदेश का कथित उल्लंघन करने के आरोप में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई।हालांकि, ये आरोप याचिकाकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं और मामले में अदालत की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

CJP के तीनों नेता रिहा

दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के तीन नेताओं अभिजीत डिपके, आशुतोष रंका और सौरव दास को 10 अक्टूबर को हिरासत में लिया था। तीनों को रविवार सुबह करीब 24 घंटे बाद रिहा कर दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें 50-50 हजार रुपये के जमानती मुचलके पर रिहा किया गया और एक वर्ष तक शांति बनाए रखने का आश्वासन लिया गया।

सुप्रीम कोर्ट में रविवार को हुई सुनवाई का केंद्र नागरिकों के मौलिक अधिकार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन की स्वतंत्रता, इंटरनेट सेवाओं की बहाली और पुलिस की कार्रवाई के दौरान कानून का पालन सुनिश्चित करना रहा। मामले में केंद्र सरकार को याचिकाओं पर जवाब देना है।