सुशासन लाने के लिए व्यक्ति के जीवन में अनुशासन है जरूरी- डाॅ. देवांश चंदेल
बोले – अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में ही शुरू हुआ भारत में मेट्रो ट्रेन का विस्तार
HNN/ शिमला
भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई के जीवन के हर क्षेत्र में अटल थे। उनके जीवन में अनेक उतार चढ़ाव आए। मगर अटल ने अपने आदर्शों सिद्धांतों और राष्ट्रवादी विचारों में कभी समझौता नहीं किया। यह बात आज मीडिया को प्रेस बयान जारी करते हुए भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष डाॅ. देवांश चंदेल ने कही।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक क्षेत्र में काम आने वाले लोगों के लिए उनके जीवन यात्रा एक प्रेरणा का पुंज है। बतौर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने 13 दिन और 13 महीने की सरकार भी चलाई, साथ ही 5 वर्ष का सफल कार्यकाल भी पूर्ण किया लेकिन कभी उनका सत्ता से मोह नहीं रहा।
उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेई जब-जब संसद में बोले तब-तब देश के आम जनमानस की समस्याओं पर बोले और हमेशा समाधान की दिशा में तर्कपूर्ण बात कही। उनकी कही बात हर कसौटी पर खरी उतरती थी। राजनीतिक एवं सामाजिक उत्कृष्ट के गुणों को आत्मसात करते हुए अटल ने अपनी वैचारिक मेधा शक्ति से सभी को प्रभावित किया।
डाॅ. देवांश चंदेल ने कहा कि 1977 में मोरारजी भाई देसाई की जनता पार्टी की सरकार में अटल ने विदेश मंत्री की तौर पर भारतीय विदेश नीति का अटल अध्याय लिखा। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेई भारतीय इतिहास के ऐसे प्रज्ञा पुरुष थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिवेशन में भारत की गौरवशाली परंपरा एवं एक सूत्र वाक्य “वसुधैव कुटुंबकम” की विवेचना के साथ सर्वप्रथम हिंदी में भाषण देकर देश के मस्तक को विश्व पटल पर गौरवान्वित करने का अद्वितीय कार्य किया।
उन्होंने कहा कि भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर उनका वह भाषण “अंधेरा छटेगा सूरज निकलेगा कमल निकलेगा” की भविष्यवाणी सच साबित हुई अटल का प्रत्येक कथन कालजई था। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मौलिक अधिकार और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से गांव को शहरों से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण कदम अटल ने उठाए।
उन्होंने कहा कि भारत में मेट्रो ट्रेन का विस्तार भी अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में ही शुरू हुआ। इसलिए उनको भारत के सुशासन और ढांचागत विकास का दूरदृष्टा भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल बिहारी वाजपेई की जयंती 25 दिसंबर को सुशासन दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया।
उन्होंने कहा कि सुशासन दिवस उनके प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि तो है ही, साथ में हम सभी के लिए प्रेरणा एवं कर्तव्य बोध का दिन भी है। उन्होंने कहा कि सुशासन लाने के लिए जरूरी है कि व्यक्तित के स्वयं के जीवन में अनुशासन हो। उन्होंने कहा कि आज पूरे देश को इस बात का गर्व है कि सुशासन की कल्पना जिनके नेतृत्व में साकार हो रही है, देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का जीवन अनुशासन की पराकाष्ठा है।
डाॅ. देवांश चंदेल ने कहा कि यह खुशी की बात है कि मोदी सरकार ने सिर्फ “सुशासन दिवस” की घोषणा मात्र नहीं की है, अपितु इस दिशा में व्यावहारिक पहल भी शुरू की है। डिजिटल इंडिया के माध्यम से जटिल प्रक्रिया को सरल किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले लोग किसी भी कार्यवाही में अपने दस्तावेज प्रमाणित कराने के लिए अधिकारी, सरपंच, नंबरदार और प्रधानाचार्य के चक्कर लगाते थे, मगर आज सेल्फ अटेस्ट कर अपने ही हस्ताक्षर कर सकते हैं।