सोयाबीन पर तीन दिवसीय बैठक संपन्न, विशेषज्ञों ने किया मंथन
पालमपुर,21 फरवरी। चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में सोयाबीन पर तीन दिवसीय एआईसीआरपी की 55वीं वार्षिक समूह बैठक शुक्रवार को संपन्न हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्यातिथि कुलपति प्रो.नवीन कुमार ने कहा कि सोयाबीन मानव और पशुधन के लिए बहुत उपयोगी फसल है। पोषक अनाजों को लेकर जिस तरह से एक योजनाबद्ध तरीके से काम किया गया उसी प्रकार विशेषज्ञों को कृषि विज्ञान केंद्रों और संबधित विभागों के माध्यम से सोयाबीन की किस्मों और तकनीकों को आम जनता के बीच पहुंचाने का प्रयास करें। ऐसा किए जाने से सोयाबीन के लाभ और उपयोगिता जन-जन तक पहुंचेगें और उत्पादन और वाणिज्य में भी इजाफा होगा।
इस दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद सोयाबीन राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान इंदौर के निदेशक डा. के.एच.सिंह ने सोयाबीन उत्पादन वाले राज्यों में नई किस्मों एवम तकनीकों के उत्पादन के लिए शोध प्रयासों के लिए विशेषज्ञों की सराहना की। डा. सिंह ने विशेषज्ञों से सोयाबीन से तैयार किए जाने वाले पनीर (टोफू) और दाल के लिए उपयुक्त सोयाबीन की किस्मों पर अधिक कार्य करने पर बल दिया।
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बैठक के दौरान केंद्रीय किस्म पहचान समिति की बैठक में सोयाबीन की अधिक उत्पादन, प्रोटीन युक्त और रोग एवं कीट रोधी किस्म ‘‘जे.एस. 2433‘‘ की रिलीज के लिए पहचान की गई है।
आयोजन सचिव डा. वेदना कुमारी ने जानकारी देते हुए बताया कि तीन दिवसीय बैठक में देश भर के विभिन्न राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों, निजी क्षेत्र और नीति निर्माताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 100 प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों द्वारा भाग लिया गया। समारोह में संविधिक अधिकारियों, विशेषज्ञों, प्रगतिशील किसानों एवम विद्यार्थियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।
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