स्थानीय नेतृत्व व प्रशासन पर मेला अव्यवस्था के लगे दाग
20 किलोमीटर दूर जामू से आई मुख्य पालकी के कारदारों को पानी तक के लिए नहीं पूछा
HNN/श्री रेणुका जी
2023 श्री रेणुका जी का पवित्र धार्मिक मेला रेणुका जी विकास बोर्ड और प्रशासन की अव्यवस्थाओं के भेंट चढ़ गया है। इस धार्मिक मेले के मुख्य प्रयोजन के प्रमुख सूत्रधारों जिनकी वजह से भगवान परशुराम और मां रेणुका जी का मिलन संभव होता है उनकी बड़ी अनदेखी की गई है। प्रमुख पालकी के मुख्य कारदार सेवा दल मंदिर कमेटी जामू भोज के प्रमुख अमर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया ऐसा पहली बार हुआ है कि हमें किसी ने भी पानी तक के लिए नहीं पूछा।

उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम जी की पालकी को उठाने वाले करीब 10 व्यक्तियों आधा दर्जन से अधिक बजंत्री और कारदारो को यात्रा के दौरान और रेणुका जी पहुंचने पर किसी ने भी पानी तक के लिए नहीं पूछा। उन्होंने तो यहां तक कहा कि जब उन्होंने इस बारे में ददाहु के पंचायत प्रधान पंकज से भी बात करी तो उन्होंने भी अपनी लाचारी व्यक्त करी। वहीं प्रशासन और स्थानीय नेता केवल मुख्य अतिथि कि आव भगत आदी मे जुटे हुए थे।

आप यह जानकर भी हैरान हो जाएंगे कि इन चार सुदूर ग्रामीण क्षेत्र से पालकियों के साथ आए हुए सेवादारों को कारदारों को जहां तो बिल्कुल शुद्ध और पवित्र भोज अलग से व्यवस्था कर खिलाना चाहिए था वहीं उन्हें आम लोगों की कैंटीन में खाने के लिए कहा गया है। भगवान परशुराम जी के प्रमुख कारदारों की इतनी बड़ी नजरअंदाजी और उनकी अपवित्रता को लेकर सैकड़ो लोगों ने नाराजगी भी व्यक्त की है।

देव प्रकाश, उदय सिंह, नारायण सिंह, पंकज सूद, रामकुमार, कमला देवी, संगीता ठाकुर आदि का कहना है कि यह धार्मिक मेला अब वीआईपी कल्चर यानी व्यक्ति विशेष बनकर रह गया है। श्रद्धालुओं का तो कहना है कि यहां के नेता अपनी नेतागिरी चमकाते हैं और प्रशासनिक अधिकारी इन नेताओं की आव भगत और जी हजूरी में ही जुटे रहते हैं। लोगों का तो यहां तक भी कहना है कि मेले में चारों तरफ गंदगी का आलम है। जहां पर पार्किंग बनाई गई है वहां लाइट आदि की कोई व्यवस्था न होने के कारण कई लोगों को चोटे भी लग चुकी हैं।

लोगों का तो यहां तक भी कहना है कि लाखों रुपए के प्लांट नीलाम किए गए हैं। लाखों करोड़ों रुपए कई तरीके से इकट्ठे किए गए हैं बावजूद इसके मेले में कहीं भी ना तो सुविधा नजर आ रही है और ना ही व्यवस्थाओं को अमली जामा पहनाया गया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि जो अलग-अलग जगह से पालकीयां लेकर आते हैं उनके ठहरने खाने आदि की व्यवस्था अन्य लोगों से बिल्कुल अलग होनी चाहिए ताकि उनकी पवित्रता बनी रहे।
हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि जहां लोगों को मेले तक आने के लिए सरकारी बसें तक नहीं मिल रही है। वहीं यहां का प्रमुख बस अड्डा अपनी व्यथा को रो रहा है। बस अड्डे का संचालन एक तंबू में किया जा रहा है। बरहाल कुल मिलाकर कहा जाए तो यह पहली बार हुआ है कि श्री रेणुका जी विकास बोर्ड और प्रशासन इस मेले को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा पाने में पूरी तरह से नाकाम हो गए हैं।