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हिमाचल की जेलों में जाति आधारित भेदभाव खत्म करने की पहल

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 23 Feb 2025 • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

नए संशोधनों के तहत समानता सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार का कदम

हिमाचल प्रदेश सरकार ने कारागारों में जाति आधारित भेदभाव को समाप्त करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देश पर हिमाचल प्रदेश जेल मैनुअल 2021 में संशोधन किया गया है, जिससे कैदियों के बीच जातिगत भेदभाव समाप्त हो सके और जेलों में समानता स्थापित की जा सके।

जेल मैनुअल में किए गए प्रमुख बदलाव

प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि जेल और सुधार संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को प्रतिबंधित करने के लिए नए प्रावधान जोड़े गए हैं।

  • जाति के आधार पर भेदभाव समाप्त: नए जोड़े गए पैरा 5.66 के अनुसार, जेल में किसी भी बंदी के साथ जाति के आधार पर भेदभाव, वर्गीकरण या अलगाव नहीं किया जाएगा।
  • जाति के आधार पर कार्य आवंटन नहीं: पैरा 5.67 के तहत, अब किसी भी कैदी को उसकी जाति के आधार पर कोई विशेष कार्य नहीं सौंपा जाएगा।
  • सफाई कार्यों में कैदियों की भागीदारी समाप्त: पैरा 5.68 में यह प्रावधान किया गया है कि कैदियों से हाथ से मैला उठाने, सीवर सिस्टम की सफाई और सेप्टिक टैंक के रखरखाव जैसे कार्य नहीं करवाए जाएंगे।

जेल रिकॉर्ड में जाति का उल्लेख नहीं होगा

पहले जेल मैनुअल में कैदियों की जाति, समुदाय और धार्मिक पहचान को दर्ज करने का प्रावधान था, लेकिन हिमाचल प्रदेश जेल मैनुअल द्वितीय संशोधन, 2025 के तहत इसे हटा दिया गया है। अब रजिस्टर नंबर एक और दो में जाति संबंधी जानकारी दर्ज नहीं की जाएगी, जिससे किसी भी प्रकार के भेदभाव की संभावना खत्म हो सके।

आदतन अपराधियों की नई परिभाषा

संशोधित नियमों में आदतन अपराधियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। यदि कोई व्यक्ति पांच वर्षों की अवधि में दो से अधिक बार किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो, तो उसे आदतन अपराधी माना जाएगा, जब तक कि उसकी सजा को अपील या समीक्षा में बदल न दिया जाए।

समानता और न्याय की दिशा में सरकार का प्रयास

सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश की जेलों में सम्मान, समानता और न्याय सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। यह संशोधन जेलों में निष्पक्ष व्यवस्था लागू करने और कैदियों को बेहतर वातावरण देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।