हिमाचल पुलिस के 38 जवान बनेंगे साइबर कमांडो, मिल रही हाईटेक ट्रेनिंग
प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए अब हिमाचल पुलिस के 38 जवानों को साइबर कमांडो के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। ये कमांडो हाईटेक तकनीकों से लैस होकर ऑनलाइन ठगों पर शिकंजा कसेंगे।
शिमला
तेजी से बढ़ते साइबर क्राइम से निपटने के लिए पुलिस को नई ताकत
पढ़े-लिखे लोग, यहां तक कि सेवानिवृत्त अधिकारी भी साइबर ठगों का शिकार बन रहे हैं। ऐसे में राज्य में साइबर अपराध की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय ने साइबर कमांडो योजना शुरू की है। इस योजना के तहत हिमाचल के 38 पुलिस कर्मियों को चुना गया है जो साइबर अपराध से निपटने की तकनीकी जानकारी हासिल करेंगे।
देश के नामी संस्थानों से मिल रही आधुनिक ट्रेनिंग
साइबर कमांडो की ट्रेनिंग छह माह की होगी और यह प्रशिक्षण देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में आयोजित किया जा रहा है। इनमें आईआईटी मद्रास, राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी गांधीनगर और नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी दिल्ली शामिल हैं। ट्रेनिंग में सिस्टम फोरेंसिक, डाटा सुरक्षा, ऑनलाइन धोखाधड़ी की जांच और रोकथाम की तकनीकों पर फोकस किया जाएगा।
इन जवानों को चुना गया है विशेष कमांडो ट्रेनिंग के लिए
चुने गए जवानों में कमलेश, मुनीष कुमार, अक्षय गुप्ता, अजय कुमार, ओंकार सिंह, विशाल शर्मा, अश्वनी ठाकुर, पूजा कश्यप, शशांक, शुभम चौहान, रोहित गुलेरिया समेत कुल 38 नाम शामिल हैं। सभी को उनकी विशेषज्ञता के आधार पर भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र द्वारा चयनित किया गया है।
साइबर खतरे के खिलाफ मजबूत सुरक्षा तंत्र का निर्माण
डीआईजी साइबर क्राइम मोहित चावला के अनुसार, साइबर कमांडो ट्रेनिंग का उद्देश्य पुलिस को साइबर अपराध से निपटने में दक्ष बनाना है। यह पहल ऑनलाइन धोखाधड़ी, संवेदनशील डाटा की चोरी और डिजिटल अपराधों की जांच में पुलिस को एक नई ताकत प्रदान करेगी।