सुप्रीम कोर्ट की समय-सीमा और राज्यसभा मुकाबला, हिमाचल में तेज हुई सियासी हलचल
हिमाचल नाऊ न्यूज शिमला :
हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक ओर राज्यसभा सीट के लिए 16 मार्च को मतदान होना है, वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश में लंबित पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर स्पष्ट समय-सीमा तय कर दी है।
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इससे मार्च का महीना राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में नगर निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव 31 मई 2026 तक हर हाल में संपन्न कराए जाएं।
साथ ही वार्ड परिसीमन और आरक्षण से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं 31 मार्च 2026 तक पूरी करने के आदेश दिए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि परिसीमन या अन्य प्रशासनिक कारणों के बहाने चुनावों को और आगे नहीं टाला जा सकता।
इससे पहले हाई कोर्ट ने अप्रैल तक की समय-सीमा तय की थी, जिसे अब बढ़ाकर 31 मई कर दिया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मार्च के अंत तक मतदाता सूचियों और मतदान केंद्रों से संबंधित कार्य पूर्ण कर लिए जाएं।
प्रदेश की एक सीट के लिए राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया जारी है। नाम वापसी के बाद राजनीतिक दल अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। 16 मार्च को मतदान होगा और उसी शाम परिणाम घोषित किए जाएंगे। यह चुनाव विधानसभा के भीतर सत्ता और विपक्ष के बीच वास्तविक संख्या बल की परीक्षा माना जा रहा है।
इस बीच सियासी माहौल भी गर्माता जा रहा है। सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार अपने विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के आधार पर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है, जबकि भाजपा ने विकास की गति और लंबे समय से लंबित स्थानीय निकाय चुनावों को प्रमुख मुद्दा बनाया है।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि मार्च के दौरान कई उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम तेज हो सकते हैं, क्योंकि इसके तुरंत बाद स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनजर आदर्श आचार संहिता लागू होने की संभावना है।
कुल मिलाकर आने वाला समय हिमाचल प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।
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