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हिमाचल में पंचायतों में लगेंगे सोलर प्रोजेक्ट, सुक्खू सरकार का ग्रीन एनर्जी और ऊर्जा बचत पर बड़ा फोकस

PRIYANKA THAKUR 23 Mar 2026 Edited 23 Mar 1 min read

Himachalnow / शिमला

हिमाचल प्रदेश में ऊर्जा बचत और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पंचायत स्तर पर सोलर प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बजट में कई नई ऊर्जा परियोजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की घोषणाएं की हैं।

शिमला

पंचायतों में सोलर प्रोजेक्ट से बढ़ेगी आय
हिमाचल प्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बड़ा ऐलान किया है। ग्राम पंचायतों में 500 मेगावाट क्षमता के ग्राउंड माउंटेड सोलर प्रोजेक्ट स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए स्रोत विकसित होंगे। अब तक चार परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं, जबकि 13 पर कार्य जारी है और सात अन्य पंचायतों में इनके लिए भूमि का चयन किया जा चुका है।

पंचायतों को मिलेगा सीधा आर्थिक लाभ
इन सोलर परियोजनाओं के शुरू होने के बाद प्रत्येक प्रोजेक्ट से लगभग 25 लाख रुपए सालाना आय होने का अनुमान है। इसमें से 30 प्रतिशत हिस्सा संबंधित ग्राम पंचायत को विकास कार्यों के लिए दिया जाएगा, जबकि 20 प्रतिशत राशि अनाथ, विधवा और वंचित वर्ग के कल्याण पर खर्च की जाएगी। इससे गांव स्तर पर आर्थिक मजबूती के साथ-साथ सामाजिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

ऊर्जा बचत की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री ने शिमला में प्रदेश का पहला सुपर एनर्जी कंजर्वेशन बिल्डिंग कोड (ईसीबीसी) के तहत भवन बनाने की घोषणा भी की है। ऊर्जा निदेशालय का यह भवन आधुनिक ऊर्जा बचत तकनीकों पर आधारित होगा और इसे इसी वर्ष शुरू करने की योजना है। यह परियोजना भविष्य में ऊर्जा दक्षता के मॉडल के रूप में भी काम करेगी।

बिजली ढांचे और ग्रीन एनर्जी पर जोर
ऊर्जा विभाग के तहत बिजली वितरण प्रणाली और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 250 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा आरडीएसएस योजना के तहत 450 करोड़ रुपए खर्च कर बिजली व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाएगा। वहीं ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए सैंज हाइड्रो प्रोजेक्ट को अन्य ऊर्जा स्रोतों के साथ जोड़कर राउंड द क्लॉक बिजली उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है।

ग्रीन कॉरिडोर और आधुनिक सेंटर से मिलेगी मजबूती
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर स्टेज-2 के तहत धर्मशाला और बैजनाथ में 63 एमवीए के दो जीआईएस उपकेंद्र लगभग 221 करोड़ रुपए की लागत से बनाए जाएंगे। इसके साथ ही ऊर्जा निदेशालय में इंटीग्रेटेड एनर्जी मैनेजमेंट सेंटर स्थापित किया गया है, जिससे बिजली प्रबंधन और ट्रेडिंग को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

ट्रांसमिशन सेंटर से हिमाचल को नई पहचान
मुख्यमंत्री ने बताया कि कुनिहार में लगभग 32 करोड़ रुपए की लागत से एचपी ट्रांसमिशन असेट मैनेजमेंट सेंटर तैयार किया गया है, जो ट्रायल के बाद इस वर्ष पूरी तरह शुरू होगा। हिमाचल प्रदेश इस तरह का सेंटर स्थापित करने वाला देश का पहला राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में राज्य को नई पहचान मिलेगी।

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